योगेश कुमार सोनी / दिल्ली
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। नीट पेपर लीक मामले में उनके इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी पिछले सवा महीने से जंतर-मंतर पर धरना दे रही है। इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने कहा, “वे कहते थे, इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।”
धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे को लेकर एक चिट्ठी पोस्ट की। दो पेज और 575 शब्दों की इस चिट्ठी में उन्होंने अन्य बातों के साथ दो स्थानों पर युवाओं को भ्रमित करने की बात भी लिखी।
12 साल में पहली बार विरोध के बाद इस्तीफा
वर्ष 2014 में पहली बार मोदी सरकार बनने के बाद 12 वर्षों के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान पहले मंत्री हैं, जिन्हें विरोध के चलते इस्तीफा देना पड़ा है। हालांकि, इससे पहले 2018 में विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर ने इस्तीफा दिया था, लेकिन उस समय दुनियाभर में ‘मी टू’ आंदोलन चल रहा था और अकबर पर पत्रकारिता के दिनों में यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे।
इस इस्तीफे के बाद युवाओं में खुशी का माहौल है। उन्होंने इसे लोकतंत्र की जीत बताया है। साथ ही, उनका कहना है कि उनकी आगे की मांगें जारी रहेंगी।
