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नीट की आग में जल रहा देश…इधर महाराष्ट्र में ‘शालार्थ’ का ₹160 करोड़ का महाघोटाला!

राजन पारकर / मुंबई

देशभर में नीट परीक्षा विवाद और छात्र आंदोलन से सियासी पारा चढ़ा हुआ है। इसी बीच महाराष्ट्र के शिक्षा विभाग में सामने आए कथित ₹160 करोड़ के ‘शालार्थ’ महाघोटाले ने सरकार को नए सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। विशेष जांच दल (एसआईटी) ने जळगांव जिला परिषद के तत्कालीन माध्यमिक शिक्षणाधिकारी शशिकांत भाऊराव हिंगोणेकर को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि वर्ष 2022 से 2025 के बीच फर्जी व्यक्तिगत मंजूरियां देकर और ‘शालार्थ’ प्रणाली में कथित रूप से अवैध प्रविष्टियां कर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया।
एसआईटी के अनुसार, नाशिक, जळगांव, धुळे और नंदुरबार जिलों में 842 शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्तियों से जुड़े दस्तावेज जांच के दायरे में हैं। प्रारंभिक जांच में लगभग 1200 लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। मामले में विभिन्न संस्थाचालकों, मुख्याध्यापकों, शिक्षा विभाग के अधिकारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच जारी है।
पालकमंत्री का दौर… अब शिक्षा मंत्री के रूप में जवाब कौन देगा?
जिस अवधि में यह कथित घोटाला सामने आया, उस दौरान संबंधित क्षेत्र की प्रशासनिक जिम्मेदारी किसके पास थी, इस पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष का कहना है कि उस समय नाशिक जिले के पालकमंत्री रहे और वर्तमान में राज्य के शिक्षा मंत्री दादा भुसे को इस पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। विपक्ष सवाल उठा रहा है कि यदि इतने बड़े पैमाने पर कथित अनियमितताएं हो रही थीं, तो निगरानी व्यवस्था क्या कर रही थी? हालांकि, अब तक जांच एजेंसियों ने दादा भुसे के खिलाफ किसी आपराधिक भूमिका का आरोप नहीं लगाया है। ऐसे में राजनीतिक जवाबदेही और आपराधिक जिम्मेदारी, दोनों अलग-अलग विषय हैं।
‘शिक्षा का मंदिर’ या भ्रष्टाचार का अड्डा?
एक ओर छात्र परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता की मांग को लेकर सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं, तो दूसरी ओर शिक्षा विभाग में सामने आए इस कथित घोटाले ने व्यवस्था की साख पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। यदि जांच में लगाए गए आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह केवल आर्थिक घोटाला नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जनता के विश्वास पर भी बड़ा आघात माना जाएगा।
अब नजर एसआईटी की अगली कार्रवाई पर
फिलहाल, पूरे राज्य की नजर एसआईटी की जांच पर टिकी है। सवाल यह है कि क्या कार्रवाई केवल कुछ अधिकारियों तक सीमित रहेगी या पूरे कथित नेटवर्क की परतें खुलेंगी? महाराष्ट्र की जनता अब इस मामले में केवल गिरफ्तारियां नहीं, बल्कि पूरी सच्चाई और जवाबदेही चाहती है।

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