मुख्यपृष्ठस्तंभगजबे है : शिक्षा विभाग का नया पाठ... `बैगलेस' से `बैकलैस' तक!

गजबे है : शिक्षा विभाग का नया पाठ… `बैगलेस’ से `बैकलैस’ तक!

उमा सिंह

लो जी, बिहार का शिक्षा विभाग एक बार फिर चर्चा में है। अपनी किसी उपलब्धि को लेकर नहीं, बल्कि अपने अजब-गजब ज्ञान को लेकर। अब आप ही बताओ कोई `बैगलेस’ को `बैकलेस’ कहे तो भला इसे क्या ही कहेंगे। जब शिक्षा विभाग ही शब्दों की पाठशाला में गलती कर बैठे, तो सवाल उठना लाजमी है, फिर बच्चे सही-गलत वैâसे सीखेंगे। जो विभाग वर्तनी और ज्ञान की जिम्मेदारी संभालता है, वही अगर अपने आदेशों में चूक कर दे तो यह सिर्फ टाइपिंग की गलती नहीं, बल्कि व्यवस्था की लापरवाही का आईना बन जाती है। दरअसल, बच्चों को बिना बैग के रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने वाली योजना `बैगलेस सेटरडे’ को विभाग के एक आधिकारिक पत्र में गलती से `बैकलेस’ लिख दिया गया। विधान परिषद में एमएलसी डॉ. संजीव कुमार सिंह ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इस गलती पर जमकर चुटकी ली। कुछ लोगों ने मजाक में कहा कि शायद विभाग ने सोचा होगा कि बैग तो हटाना है, इसलिए शब्द से भी कुछ हटाकर `बैकलेस’ बना दिया! लेकिन हंसी-मजाक के पीछे एक गंभीर सवाल भी छिपा है, क्या सरकारी दस्तावेजों की जांच इतनी कमजोर हो गई है? हालांकि, एक टाइपिंग गलती पूरे विभाग की क्षमता का पैमाना नहीं हो सकती, लेकिन शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में छोटी-छोटी लापरवाहियां भी बड़ी बहस को जन्म देती हैं। क्योंकि जब शिक्षक और छात्र से शुद्धता की उम्मीद की जाती है, तो विभागीय आदेशों में भी उतनी ही सावधानी जरूरी है। अब देखना होगा कि यह मामला सिर्फ एक मजेदार किस्सा बनकर रह जाता है या फिर विभाग अपनी कार्यप्रणाली में सुधार की दिशा में कोई ठोस कदम उठाता है।

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