अरुण कुमार गुप्ता
कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के सामने आखिरकार नरेंद्र मोदी सरकार को झुकना पड़ा। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पद से इस्तीफा दे दिया, लेकिन यहां यह बात ध्यान देने वाली है कि प्रधान ने इस्तीफा खुद दिया है, मोदी ने उनका इस्तीफा लिया नहीं। सवाल फिर भी वही है, काले नाग पर भरोसा किया जा सकता है, लेकिन नरेंद्र मोदी पर नहीं। इसी मुद्दे को लेकर एक और ध्यान देने वाली बात है कि नरेंद्र मोदी ने युवाओं के बढ़ते आंदोलन और आक्रोश को देखते हुए पहले शिक्षा विभाग के सचिव विनीत जोशी को हटाकर नरेश पाल गंगवार को मुख्य सचिव की जिम्मेदारी सौंप दी। अब सवाल यह है कि क्या गंगवार भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक होने से बचा पाएंगे, जो खुद सवालों से घिरे हैं। अब आप गंगवार की कुंडली देखिए! गंगवार की ईमानदारी और साफ छवि के बारे में आपको जानकर हैरानी होगी। गंगवार का नाम पहले से ही एक स्वैâम में है, जिसमें गंगवार परिवार को एक करोड़ १६ लाख की सब्सिडी मिली है। पिछले जून महीने में इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल में पता चला कि गंगवार की पत्नी, बेटे और मां को खीरे की खेती के लिए सरकार से एक करोड़ १६ लाख से ज्यादा की सब्सिडी मिली है। पत्नी को २४.३६ लाख रुपए, बेटे को ४६.४९ लाख रुपए और मां को ४६.०३ लाख की सब्सिडी मिली है। ये सारे पैसे गरीब किसानों के लिए आवंटित किए गए थे, जिसे गंगवार परिवार को दे दिया गया। यह सब तब हुआ जब गंगवार पर्यावरण व वन मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव थे। अब आप सोचिए ऐसा व्यक्ति शिक्षा विभाग में मुख्य सचिव रहेगा तो पेपर लीक रोकेगा या फिर पेपर लीक करवाएगा?
पुराना भारत और मोदी का नया भारत!
आज हम पुराने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए भारत की बात करते हैं। पुराने भारत में हम मंदिर बनाते थे, मुगल आते थे और लूटकर चले जाते थे, लेकिन आज आत्मनिर्भर भारत है। हम खुद मंदिर बनाते हैं और खुद लूट लेते हैं। यही नहीं देश से क्या-क्या गायब है, उसकी भी बात कर लेते हैं। राम मंदिर से चंदा गायब है। केदारनाथ मंदिर से २२८ किलो सोना गायब है। चुनाव आयोग से ईवीएम गायब है। गोदी मीडिया से ईमानदारी गायब है। इथेनॉल के नाम पर गाड़ियों का माइलेज गायब है। नीट में छात्रों का भविष्य गायब है। कोयला मंत्रालय करोड़ों का कोयला गायब है। स्वास्थ्य मंत्रालय से स्वास्थ्य गायब है। इन सबके बीच हमारा विश्वगुरु भी देश से गायब है, लेकिन फिर भी अंधभक्त कहते हैं कि देश सही हाथों में है। मोदी जी जिसे आप मौनमोहन कहते थे, उनके सामने मजबूरी थी। वे नेता नहीं थे, अर्थशास्त्री थे। आप तो फुल मेज्योरिटी के साथ देश की सत्ता में आए थे। आपने ही २०१४ में कहा था कि मनमोहन जी बोलते नहीं है। यह पैमाना आप पर भी लागू होता है। आप भी कोई मुद्दा उठता है तो मौन क्यों साध लेते हैं। मोदी जी आप केवल मन की बात करते हैं। दूसरे के मन की बात कब करेंगे। यह तो बता दीजिए।
