मुख्यपृष्ठनए समाचारजलगांव में बुझ रहीं उम्मीदों की सांसें!..छह महीने में ४४३ आत्महत्याएं... ९०...

जलगांव में बुझ रहीं उम्मीदों की सांसें!..छह महीने में ४४३ आत्महत्याएं… ९० मौतों के पीछे शराब की लत

-७४ मामलों में अवसाद और ५२ में कर्ज बना जानलेवा कारण

सुनील ओसवाल / मुंबई

महाराष्ट्र के जलगांव जिले से सामने आए आंकड़ों ने समाज और प्रशासन दोनों की चिंता बढ़ा दी है। वर्ष २०२६ के पहले छह महीनों (१ जनवरी से ३० जून) के दौरान जिले में कुल ४४३ लोगों ने आत्महत्या कर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। पुलिस के विस्तृत विश्लेषण में सामने आया है कि इन घटनाओं के पीछे अवसाद, शराब की लत, पारिवारिक विवाद, कर्ज का बोझ, बीमारी और मानसिक तनाव जैसे कई कारण जिम्मेदार रहे। इनमें २९ लोगों ने शादी नहीं हो पाने की वजह से आत्महत्या की, जो बदलती सामाजिक परिस्थितियों का एक गंभीर संकेत माना जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, जिले में औसतन प्रतिदिन दो से तीन आत्महत्याएं हुर्इं। आत्महत्या करने वालों में ३८३ वयस्क पुरुष, २९ महिलाएं, ११ नाबालिग लड़कियां और ८ नाबालिग लड़के शामिल हैं। वहीं, आत्महत्या के लिए उकसाने के केवल १२ मामले दर्ज किए गए। विश्लेषण में शराब की लत सबसे बड़ा कारण बनकर सामने आई, जिसके चलते ९० लोगों ने जान दे दी। इसके अलावा ७४ लोगों ने अवसाद, ६१ ने पारिवारिक विवाद, ५२ ने कर्ज और ४४ ने बीमारी से परेशान होकर आत्महत्या की। वहीं, शादी तय न होना २९ आत्महत्याओं का कारण पाया गया। प्रेम संबंध, मानसिक बीमारी और परीक्षा का दबाव भी कुछ मामलों में वजह बने।
थानावार आंकड़ों में एमआईडीसी पुलिस थाना क्षेत्र सबसे ऊपर रहा, जहां ३१ आत्महत्याएं दर्ज हुर्इं। इसके बाद पारोला (२८), अमलनेर (२३), जलगांव तालुका (२२) और भडगांव (२१) का स्थान रहा। महिलाओं के मामलों में पारिवारिक तनाव और अवसाद प्रमुख कारण रहे, जबकि नाबालिगों में पारिवारिक माहौल, मानसिक दबाव, परीक्षा का तनाव और प्रेम संबंध जैसी वजहें सामने आर्इं। इन आंकड़ों के आधार पर पुलिस ने एमआईडीसी, पारोला, अमलनेर, जलगांव तालुका और भडगांव क्षेत्रों में आत्महत्या रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाने की जरूरत बताई है। साथ ही व्यसनमुक्ति, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, समय पर काउंसलिंग, पारिवारिक संवाद और आर्थिक नियोजन पर विशेष जोर देने की सिफारिश की गई है।
हर दिन बुझ रहीं दो-तीन जिंदगियां
जलगांव में छह महीनों में ४४३ आत्महत्याओं ने समाज को झकझोर दिया। औसतन हर दिन दो से तीन लोगों ने जान गंवाई। शराब की लत, अवसाद, पारिवारिक विवाद, कर्ज और बीमारी सबसे बड़े कारण बनकर सामने आए। विशेषज्ञ इसे मानसिक स्वास्थ्य संकट की गंभीर चेतावनी मान रहे हैं।

 

अन्य समाचार