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सीसीटीवी निगरानी प्रणाली पर फिर गरमाया विवाद… नई मुंबई में ६८ डिजिटल होर्डिंग्स का प्रस्ताव

मनमोहन सिंह / नई मुंबई

नई मुंबई महानगरपालिका द्वारा शहर भर में सीसीटीवी आधारित ट्रैफिक निगरानी प्रणाली स्थापित करने के नाम पर ६८ प्रमुख स्थानों पर डिजिटल विज्ञापन बोर्ड लगाने के प्रस्ताव ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। पाम बीच रोड पर डिजिटल विज्ञापनों से जुड़े पिछले विवाद के अभी पूरी तरह शांत न होने के बीच आए इस प्रस्ताव पर नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने सवाल उठाए हैं।
विरोध और चिंताएं
सड़क सुरक्षा बनाम विज्ञापन: स्थानीय निवासियों और यात्रियों (जैसे नेरुल और वाशी के नागरिकों) ने चिंता जताई है कि सड़कों पर बड़े डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड से ड्राइवरों का ध्यान भटक सकता है, जिससे हादसों का खतरा बढ़ेगा।
पिछला विवाद जारी: बेलापुर विधायक मंदा म्हात्रे द्वारा विधानसभा में आपत्ति जताने के बाद नगर विकास राज्य मंत्री माधुरी ने पाम बीच रोड के प्रोजेक्ट को लंबित रखने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद नया विशाल प्रोजेक्ट लाने पर सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों ने मांग की है कि अनुबंध देने से पहले सड़क सुरक्षा आकलन, जनसुनवाई और पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि सार्वजनिक सुरक्षा से कोई समझौता न हो।
परियोजना के मुख्य बिंदु
ट्रैफिक निगरानी व सुरक्षा: प्रस्ताव के अनुसार, प्रमुख चौराहों, राष्ट्रीय राजमार्गों और मुख्य सड़कों पर हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी वैâमरे, लाइव ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम और आपातकालीन चेतावनी डिस्प्ले लगाए जाएंगे। यह पूरा नेटवर्क इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जुड़ा होगा।
पीपीपी मॉडल: २० वर्षों के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत लागू की जाने वाली इस परियोजना में अनुमानित रु.२७०.९८ करोड़ का पूंजीगत खर्च और रु.६४९ करोड़ का संचालन एवं रखरखाव खर्च शामिल है।
निजी ठेकेदार के अधिकार: ठेकेदार ही स्थापना, बिजली, इंटरनेट और रखरखाव का खर्च उठाएगा। इसके बदले उसे डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड पर विज्ञापन प्रदर्शित करने का अधिकार मिलेगा। एनएमएमसी ने प्रति स्थान न्यूनतम रु.३५,०३५ प्रति माह का प्रीमियम तय किया है, जिससे पहले वर्ष लगभग रु.२८.८२ करोड़ का राजस्व मिलने की उम्मीद है।

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