-देश के आधे से ज्यादा हाईवे प्रोजेक्ट्स की रफ्तार थमी
ई राज
देश में आधारभूत ढांचे के तेजी से विकास के दावों के बीच एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा संसद (राज्यसभा) में दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, देशभर में चल रही कुल १,१९१ राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में से आधे से अधिक, यानी ६२९ प्रोजेक्ट्स अपनी निर्धारित समय-सीमा में पूरे नहीं हो सके हैं।
इस सूची में महाराष्ट्र सबसे शीर्ष पर है, जहां ११७ चालू परियोजनाओं में से सर्वाधिक ६० राष्ट्रीय राजमार्गों का काम अधर में अटका हुआ है। इस सूची में कर्नाटक दूसरे स्थान पर (७७ में से ४७ प्रोजेक्ट्स लंबित) और उत्तर प्रदेश तीसरे स्थान पर (८७ में से ४४ प्रोजेक्ट्स लंबित) है।
प्रोजेक्ट्स में देरी के मुख्य कारण
मंत्रालय के डेटा से स्पष्ट होता है कि इन परियोजनाओं में हो रहे विलंब के पीछे कई ढांचागत और प्रशासनिक अड़चनें जिम्मेदार हैं।
भूमि अधिग्रहण और एनओसी में देरी: जमीन अधिग्रहण को लेकर स्थानीय विवाद और मुआवजा बांटने की धीमी प्रक्रिया।
पर्यावरणीय मंजूरियां: वन एवं पर्यावरण विभाग की ओर से क्लीयरेंस मिलने में लगने वाला लंबा समय।
ठेकेदारों की माली हालत: निर्माण सामग्री के दामों में बढ़ोतरी और वित्तीय संकट के चलते ठेकेदारों द्वारा काम की रफ्तार धीमी करना या रोकना।
बढ़ता आर्थिक बोझ और आम जनता की परेशानी
परियोजनाओं में हो रही इस भारी देरी के चलते न केवल निर्माण लागत कई गुना बढ़ रही है, बल्कि सरकारी खजाने पर भी दबाव पड़ रहा है। अधर में लटके इन हाईवे के कारण हादसों की आशंका बढ़ गई है, भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही है और यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई में लगने वाला समय और र्इंधन दोनों बर्बाद हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नए प्रोजेक्ट्स की घोषणाओं के साथ-साथ लंबित परियोजनाओं की नियमित समीक्षा और अंतर-विभागीय तालमेल बढ़ाना बेहद जरूरी है, ताकि आम जनता को सहूलियत मिल सके।
