धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने से हमारी शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल बदलाव हो गया, ऐसा बिल्कुल नहीं है। प्रधान के इस्तीफे से `पेपर लीक’ का रिसाव रुक जाएगा, यह भी कोई दावे के साथ नहीं कह सकता। क्योंकि पिछले दस-बारह वर्षों में शिक्षा से जुड़ी पूरी व्यवस्था ही सड़ चुकी है। स्कूली किताबों के पन्ने-पन्ने से इतिहास बदल दिया गया। पाठ्यक्रमों में `संघ’ मंडली को जैसा चाहिए था, वैसा इतिहास घुसा दिया गया। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सच्चे इतिहास के पन्ने किताबों से फाड़कर फेंक दिए गए। अब नए इतिहास में आधिकारिक तौर पर इतना ही लिखना बाकी रह गया है कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में कांग्रेस, वामपंथी दलों और समाजवादी लोगों का कोई योगदान नहीं था। यह लड़ाई सम्माननीय हेडगेवार ने शुरू की थी और मोदी ने आजादी का तिरंगा २०१४ में फहराया! ऐसी विचारधारा वाले देश में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान का क्या महत्व रह जाएगा? `इसरो’ से १०० वैज्ञानिकों ने इस्तीफे दिए। इसका क्या कारण हो सकता है? संभवत: इन वैज्ञानिकों पर दबाव रहा होगा कि गोमूत्र या गोबर से ऊर्जा बनाकर उसके बल पर अंतरिक्ष यान और मिसाइलें छोड़ें। ऐसी विचारधारा वाली सरकार में `परीक्षा’ एक तमाशा बनकर रह जाती है और पेपर लीक उसका कर्मफल साबित होता है। सरकार ने `पेपर लीक’ पर संसद में एक विधेयक पेश किया है, लेकिन यह विधेयक पुरानी बोतल में पुरानी ही शराब डालने जैसा है। संसद में पेपर लीक से जुड़े विधेयक पर चर्चा चल रही थी, उसी दौरान महाराष्ट्र में हुई कुछ और प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने की खबरें परेशान करने वाली हैं। महाराष्ट्र में महीनेभर पहले
दस परीक्षाओं के पेपर
लीक हो गए। अब एमएच-सीईटी का पेपर लीक हो गया। देवेंद्र फडणवीस जैसे मुख्यमंत्री के राज्य में रहते हुए पेपर लीक का यह रिसाव चल रहा है। इसी बीच एक वीडियो-ऑडियो बातचीत वायरल हुई, जो सबको दहला देने वाली है। इस बातचीत में एक शिक्षक बता रहा है, `बारहवीं की बोर्ड परीक्षा में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और गणित में सिर्फ ४० से ५० प्रतिशत अंक पाने वाले छात्रों को सीईटी में ९८, ९९ या १०० प्रतिशत अंक मिले हैं! यह वैâसे संभव है? एक साधारण छात्र दिन-रात पढ़ाई करके भी इतने अंक हासिल नहीं कर सकता। फिर अंकों का यह होलसेल बाजार सजाया किसने?’ इसे तो `नीट’ पेपर लीक से भी ज्यादा खौफनाक कहना पड़ेगा। उससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि एक जिम्मेदार महिला का `ऑडियो’ सामने आया है। उसमें वह कह रही है, `१२ लाख रुपए दीजिए। आपको स्पेशल परीक्षा केंद्र दिला देती हूं। उस केंद्र पर परीक्षा देने के बाद ९९ प्रतिशत अंक दिला देती हूं।’ इसका सीधा मतलब यह है कि परीक्षा और नतीजे पहले ही नीलामी में बेचे जा रहे हैं। संबंधित लोगों ने इन सब बातों का खंडन किया है, लेकिन अब महाराष्ट्र की शिक्षा और परीक्षा प्रणाली पर लोगों का भरोसा नहीं रहा। मुख्यमंत्री इस पूरे मामले की जांच के लिए एक और `एसआईटी’ गठित करेंगे और तुरंत मोदी-शाह से मिलने दिल्ली रवाना हो जाएंगे। बच्चों के भविष्य का सत्यानाश हो जाए तो भी चलेगा। गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों तथा उनके अभिभावकों का यह शोषण है। वे अपने बच्चों के कोचिंग क्लास के लिए कर्ज लेकर लाखों रुपए खर्च करते हैं। उनके बच्चे पढ़ाई करते हैं, लेकिन
धनवानों के बच्चे
लाखों रुपए खर्च करके पेपर खरीद लेते हैं या स्पेशल सेंटर का इंतजाम कर लेते हैं और पास भी हो जाते हैं। गरीबों के साथ यह धोखाधड़ी महाराष्ट्र में खुलेआम चल रही है। महाराष्ट्र कभी शिक्षा के लिए एक आदर्श राज्य हुआ करता था। पुणे जैसा शहर विद्या का मायका माना जाता था। आज वह पेपर लीक के अड्डे के रूप में बदनाम हो गया। शिक्षा में भी जब घोटाले होने लगें, तो बेशक समझ लीजिए कि इस देश की नैतिकता रसातल में चली गई है। महाराष्ट्र के सभी सरकारी शैक्षणिक संस्थान, विश्वविद्यालय और उनके कुलपति शुद्ध भाजपाई हैं। वे एक ही विचारधारा से ग्रस्त और पीड़ित हैं। वे सिर्फ अपने ही गुट के लोगों को आगे बढ़ाने के लिए शैक्षणिक नीतियां और परीक्षा प्रणालियां लागू करते हैं। इसीलिए देश में पेपर लीक से लेकर अंक-चोरी तक सारे अपराध दिन-दहाड़े खुलेआम हो रहे हैं। योग्यता और पात्रता न रखने वाले लोगों को देशभर के `कुलपति’ पदों पर नियुक्त किया गया है। यह बात बेहद गंभीर है। फिर से ऐसी नियुक्तियां करते हुए सरकार को थोड़ी-सी भी शर्म नहीं आती। देश के कुछ कुलपतियों पर धोखाधड़ी और गबन जैसे मामले दर्ज हुए हैं। उनमें से कुछ नमूने महाराष्ट्र में भी मौजूद हैं। परभणी के कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति ने हिसाब-किताब में करोड़ों का घपला किया, फिर भी उन्हें बचाया जा रहा है। महाराष्ट्र के ही १६० करोड़ के `शालार्थ आईडी’ घोटाले मामले में भी जलगांव के संजय गरुड़ नाम के एक भाजपा नेता को अब गिरफ्तार किया गया है। लुब ए लुआब यह है कि देश की शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है और महाराष्ट्र उसमें भी आगे ही है। शिक्षा समाज की बुनियाद होती है, लेकिन अगर वही व्यवस्था ढह गई तो समाज भी ढह जाएगा। इसे वक्त रहते नहीं रोका गया, तो इतिहास मोदी-शाह-फडणवीस वगैरह को कभी माफ नहीं करेगा।
