-एडल्ट को ‘बच्चा’ और फर्स्ट क्लास को सेकंड क्लास बना दिया
-गलत टिकट, दोहरी वसूली और रिफंड से इनकार
-रेलवे की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल
जेदवी
यात्रियों की सुविधा के नाम पर रेलवे स्टेशनों पर लगाई गई ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीनें अब खुद परेशानी का सबब बनती जा रही हैं। आधुनिक तकनीक के दम पर लंबी कतारों से राहत देने का दावा करने वाला रेलवे अपनी मशीनों की खराब देखरेख और लापरवाही के कारण यात्रियों को आर्थिक नुकसान झेलने पर मजबूर कर रहा है। ताजा मामला घाटकोपर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक-१ पर लगी एटीवीएम मशीन क्रमांक-२३ का है, जहां तकनीकी गड़बड़ी ने एक यात्री को लगातार दो बार गलत टिकट थमा दिया। हैरानी की बात यह रही कि गलती मशीन की थी, लेकिन नुकसान यात्री की जेब पर पड़ा।
जानकारी के अनुसार, यात्री हुसैन ने घाटकोपर से भायखला तक का फर्स्ट क्लास एडल्ट टिकट लेने के लिए मशीन में सभी विकल्प सही ढंग से चुने। टिकट निकलते ही उसके होश उड़ गए। फर्स्ट क्लास एडल्ट टिकट की जगह मशीन ने ‘४ चाइल्ड’ का टिकट जारी कर दिया। इसे सामान्य तकनीकी भूल समझकर उसने दोबारा पूरी प्रक्रिया दोहराई, लेकिन इस बार भी मशीन ने फर्स्ट क्लास टिकट देने के बजाय सेकंड क्लास के चार एडल्ट टिकट निकाल दिए।
लगातार दो बार हुई इस गड़बड़ी के बाद यात्री ने मौके पर मौजूद कर्मचारियों से शिकायत की, लेकिन किसी के पास संतोषजनक जवाब नहीं था। मामला टिकट कार्यालय तक पहुंचा, जहां शुरुआत में मशीन की खामी स्वीकारने के बजाय गलती का ठीकरा यात्री के सिर फोड़ने की कोशिश की गई। यात्री का कहना था कि उसने दोनों बार फर्स्ट क्लास एडल्ट का ही विकल्प चुना था। सबसे गंभीर बात यह रही कि गलत टिकट मिलने के बावजूद यात्री को रिफंड नहीं मिला। सही टिकट लेने के लिए उसे तीसरी बार भुगतान करना पड़ा, जिससे रु.८० का सीधा नुकसान हुआ। समय की बर्बादी अलग।
मशीन की जांच होगी :अधिकारी
टिकट अधिकारी आरिफ खान ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत हुआ कि संभवत: यात्री से टिकट निकालते समय गलत विकल्प का चयन हुआ होगा। हालांकि शिकायत दर्ज कर ली गई है। संबंधित एटीवीएम मशीन की तकनीकी जांच कराई जाएगी और यदि कोई खराबी पाई गई तो उसे तत्काल दुरुस्त किया जाएगा, जबकि दोनों टिकटों के रिफंड को लेकर उन्होंने साफ इनकार कर दिया।
