-समय सीमा टूटी, लागत बढ़ी अब मजदूरों की कमी का बहाना!
जेदवी / मुंबई
मुंबई के बहुप्रतीक्षित एलफिंस्टन डबल-डेकर ब्रिज और शिवड़ी-वर्ली कनेक्टर परियोजना की रफ्तार एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन उपलब्धि के लिए नहीं बल्कि लगातार हो रही देरी के कारण। सितंबर २०२६ तक परियोजना पूरी करने का दावा अब पूरी तरह धराशायी हो चुका है। अब संबंधित एजेंसियां जनवरी-फरवरी २०२७ तक परियोजना शुरू होने की उम्मीद जता रही हैं। लगातार बदलती समय सीमा, बढ़ती लागत और नए-नए कारणों ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रभादेवी के ११२ वर्ष पुराने एलफिंस्टन ब्रिज की जगह बन रहा करीब ४.५ किलोमीटर लंबा डबल-डेकर फ्लाईओवर भविष्य में अटल सेतु, शिवड़ी-वर्ली कनेक्टर और बांद्रा-वर्ली सी लिंक को जोड़ने वाला अहम संपर्क मार्ग माना जा रहा है और जिस मुंबई की समस्या का बड़ा समाधान बताया गया था, वही परियोजना आज खुद देरी और अव्यवस्था का प्रतीक बनती जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, रेलवे से समय पर मेगा ब्लॉक नहीं मिलना, पुराने रेलवे पुल को हटाने में हुई देरी, भूमिगत सीवेज लाइनें और स्टॉर्म वॉटर ड्रेनों के कारण निर्माण प्रभावित हुआ। अब इन कारणों के साथ मजदूरों की कमी को भी देरी की बड़ी वजह बताया जा रहा है। सवाल यह है कि हजारों करोड़ रुपए से जुड़े इतने बड़े मेगा प्रोजेक्ट में यदि पर्याप्त श्रमिकों की व्यवस्था भी समय पर नहीं हो सकी, तो परियोजना प्रबंधन की तैयारी पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब अतिरिक्त श्रमिक लगाकर काम तेज करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन ऐसे दावे पहले भी कई बार किए जा चुके हैं।
बढ़ती लागत, बढ़ती इंतजार की कीमत
जनवरी २०२१ में लगभग रु.१,०५१.८६ करोड़ अनुमानित यह परियोजना अब रु.१,२०० करोड़ से अधिक की हो चुकी है। पुनर्वास पर भी करीब रु.३,५०० करोड़ खर्च होने का अनुमान है। समयसीमा बार-बार बढ़ने से मुंबईकरों को राहत नहीं, बल्कि जाम, धूल और बढ़ती लागत का बोझ ही मिल रहा है।
