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मुस्लिम वर्ल्ड : एक साथ उठे ११२ जनाजे!.. गाजा का दिल दहलाने वाला मंजर

सूफी खान

जनाजों का कारवां…बच्चे बुजुर्ग और महिलाओं के जनाजों का कारवां। ११२ मय्यत उठी हैं एक साथ गाजा में। फिलिस्तिनी परचम में लिपटे जनाजे इजरायल पर आक्रामकता के आरोपों की गवाही दे रहे थे।
अब गाजा सिटी में एक इजरायली हवाई हमले के करीब तीन साल बाद मलबे से ११२ फिलिस्तीनियों की लाशें और इंसानी अवशेष बरामद किए गए हैं। इनमें एक ही परिवार की एक साथ कई लाशें थीं। जिनमें महिलाएं और बच्चे दोनों शामिल थे। गाजा सिविल के सिविल डिफेंस के मुताबिक, अक्टूबर २०२३ में हमास के हमलों के बाद जब इजरायल ने गाजा पर कहर बरपाना शुरू किया तो हजारों लोग मारे गए। उनमें से ११२ लोगों का ये पहला जनाजा है, जो काफिले में निकला। कहा जा रहा है कि अभी तो ये शुरुवात है जैसे-जैसे खोजबीन आगे बढ़ेगी और मलबे टटोले जाएंगे तो उसके नीचे से हजारों लाशें या फिर उनके बाकियात या अवशेष निकलेंगे। कहा जा रहा है कि करीब ८ हजार शव गाजा में उन इमारतों के मलबे के नीचे दबे हैं, जिन्हें इजरायल के बमों ने जमींदोज कर दिया था।
तबाह ओ बर्बाद हो चुके गाजा का सिविल डिफेंस डिपार्टमेंट बता रहा है कि बचाव दल ने १७ दिनों तक लगातार अभियान चलाकर ११२ लाशें या उनके अवशेष बरामद किए। मीडिया रिपोर्ट बता रही है कि गाजा में राहतकर्मियों को पर्याप्त मशीनरी नहीं होने की वजह से कंक्रीट और मुड़े हुए लोहे के ढेर को हटाकर हाथों और कम मशीनों के जरिए खोजबीन करनी पड़ रही है।
इजरायल के लगातार हमलों के बीच राहत दल उस इलाके तक नहीं पहुंच पा रहे थे, जहां लाशें दबी हुई थीं। जुलाई के मध्य में टीमों को पहली बार वहां पहुंचने का मौका मिला, जिसके बाद अगले दो सप्ताह तक मलबे में लाशों और उनके बाकियात की तलाश का अभियान चलाया गया। बताया जा रहा है कि ११२ जनाजों में ४४ बच्चों के जनाजे शामिल हैं। बचाव अभियान में इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस की ओर से किराये पर उपलब्ध कराए गए दो एक्सकेवेटर या (खुदाई मशीन) का इस्तेमाल किया गया। वहीं मीडिया रिपोर्ट बता रही हैं कि इजरायल की फोर्स आईडीएफ ने इतने बड़े पैमाने पर लाशें मिलने पर सिर्फ इतना ही कहा कि ये हमास की वजह से हुआ, क्योंकि हमास आबादी वाले इलाकों में छिपता है और उसकी वजह से गाजा के आम लोग इजरायल के हमलों में मारे जाते हैं। लेकिन गाजा की हेल्थ मिनिस्ट्री बताती है कि इजरायल अपनी आक्रामकता को छिपा नहीं सकता, उसके अनुसार, ७ अक्टूबर २०२३ को हमास के हमले के बाद शुरू हुए इजरायली सैन्य अभियान में अब तक ७३,००० से अधिक फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है।

न जाने कितनी लाशें इस वक्त मलबे के अंदर दबी हैं, जो अब सिर्फ ढांचे में तब्दील हो गई हैं, जिन्हें पहचानना भी बेहद मुश्किल है। लेकिन फिलिस्तीन के लोग मानते हैं कि ये गाजा के शहीद हैं और कम से कम इन्हें फिलिस्तीन के परचम में लपेटकर, उसी धरती की दो गज जमीन नसीब हो सके। जिस मातृभूमि के लिए उन्होंने कब्जाधारी ताकतों से लड़ते हुए अपनी नस्लें गवां दी।

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