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मेट्रो के दावों में फंसी मुंबई…सफर बना रोज का संग्राम

-करोड़ों के प्रोजेक्ट के बावजूद अधूरी कनेक्टिविटी और लंबा इंतजार
-पीक ऑवर्स में प्लेटफॉर्म तक पहुंचने के लिए कतारें

द्रुप्ति झा / मुंबई

मुंबई को विश्वस्तरीय परिवहन व्यवस्था देने के सरकारी दावों के बीच जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट नजर आ रही है। एक ओर मेट्रो नेटवर्क विस्तार और नए कॉरिडोरों का प्रचार हो रहा है, वहीं दूसरी ओर रोजाना लाखों मुंबईकर भीड़, लंबी कतारों और अधूरी कनेक्टिविटी के कारण बदहाल सफर करने को मजबूर हैं। पीक ऑवर्स में कई मेट्रो स्टेशनों पर टिकट और प्लेटफॉर्म तक पहुंचने के लिए १५ से २० मिनट तक इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि स्टेशनों से बाहर निकलने के बाद ऑटो, टैक्सी और फीडर बसों की कमी यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ा रही है।
सरकार का दावा था कि नए मेट्रो कॉरिडोर शुरू होने से लोकल ट्रेनों और सड़कों पर दबाव कम होगा, लेकिन अधूरी लास्ट-माइल कनेक्टिविटी ने इन दावों की पोल खोल दी है। कई स्थानों पर यात्रियों को मेट्रो स्टेशन तक पहुंचने के लिए एक से दो किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है या फिर ट्रैफिक जाम में फंसकर अतिरिक्त समय गंवाना पड़ता है। नतीजा यह है कि समय बचाने के लिए शुरू की गई मेट्रो सेवा कई यात्रियों के लिए नई परेशानी बनती जा रही है। यात्री सुखदेव खन्ना का कहना है कि नौकरी पर समय से पहुंचना अब रोज की जंग बन गया है। मेट्रो स्टेशन पर लंबी कतारें, बाहर वाहनों का अभाव और शहरभर में ट्रैफिक जाम ने सफर को तनावपूर्ण बना दिया है।
मेट्रो को मिल रहा है रेलवे की बदहाली का फायदा!
धक्का-मुक्की और मारामारी से मुंबईकर परेशान
मुंबईकरों का रुझान अब तेजी से मेट्रो की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। इसका ताजा प्रमाण एमएमआरडीए संचालित मेट्रो नेटवर्क द्वारा ३० करोड़ यात्रियों का आंकड़ा पार करना है, जिसे एमएमआरडीए उपलब्धि बता रहा है। एमएमआरडीए के अनुसार, ३ अगस्त २०२६ तक मेट्रो लाइन-२ए (दहिसर पूर्व–अंधेरी पश्चिम), लाइन-७ (दहिसर पूर्व–गुंदवली), लाइन-२बी (चरण-१) और लाइन-९ (चरण-१) को मिलाकर नेटवर्क ने ३० करोड़ यात्रियों का आंकड़ा पार कर लिया। सबसे उल्लेखनीय तथ्य यह है कि अंतिम ५ करोड़ यात्रियों का सफर महज १७९ दिनों में पूरा हुआ, जो अब तक का सबसे तेज चरण है। इसी अवधि में औसत दैनिक यात्री संख्या २.७० लाख से बढ़कर २.७९ लाख हो गई।

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