-स्कूल जाने के बहाने घर से निकलीं…बैग में किताबों की जगह रखे थे कपड़े…शंकरगढ़ पुलिस ने लोकेशन ट्रेस कर सुरक्षित बरामद किया
राजेश सरकार / प्रयागराज
घर में पढ़ाई को लेकर होने वाली डांट-डपट से नाराज तीन नाबालिग छात्राओं ने एक साथ घर छोड़ दिया। स्कूल जाने के बहाने निकलीं छात्राओं ने अपने स्कूल बैग में किताबों की जगह कपड़े रखे थे। देर शाम तक घर नहीं लौटने पर परिजनों को अनहोनी की आशंका हुई और तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। एक साथ तीन नाबालिगों के लापता होने की सूचना मिलते ही कमिश्नरेट की शंकरगढ़ पुलिस सक्रिय हो गई। पुलिस की तत्परता और लगातार लोकेशन ट्रेसिंग के चलते तीनों छात्राओं को शनिवार को बरगढ़-शंकरगढ़ क्षेत्र स्थित परानू बाबा के मेले से सकुशल बरामद कर लिया गया।
पुलिस के अनुसार, रानीगंज गांव निवासी तीनों छात्राएं शुक्रवार को घर से स्कूल जाने के नाम पर निकली थीं। इनमें दो सगी बहनें हैं, जबकि तीसरी उनकी पड़ोस में रहने वाली सहेली है। एक की उम्र करीब 16 वर्ष तथा दो की उम्र करीब 13 वर्ष बताई गई है। घर से निकलते समय तीनों ने स्कूल बैग में किताबों के बजाय कपड़े रख लिए थे। शाम तक उनके वापस नहीं आने पर परिजनों ने आसपास और रिश्तेदारों के यहां तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
सूचना मिलते ही शंकरगढ़ पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तलाश शुरू की। पुलिस टीम ने तकनीकी माध्यमों से छात्राओं की लोकेशन खंगाली तो उनके डभौरा क्षेत्र में होने की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस और परिजन उनकी तलाश में जुट गए। लगातार निगरानी और लोकेशन ट्रेसिंग के बीच छात्राओं के छिवकी पहुंचने और फिर बस से जसरा आने की जानकारी सामने आई।
पूछताछ में छात्राओं ने पुलिस को बताया कि घर में पढ़ाई को लेकर उन्हें अक्सर डांट-डपट का सामना करना पड़ता था। उनके मुताबिक कभी-कभी मार भी पड़ती थी। इसी नाराजगी में तीनों ने घर छोड़ने का फैसला कर लिया। वे शंकरगढ़ स्टेशन पहुंचीं और ट्रेन से डभौरा गईं। वहां दूसरी ट्रेन पकड़कर छिवकी पहुंचीं। इसके बाद बस से जसरा लौट आईं और रात स्टेशन पर गुजारी। सुबह घर जाने के बजाय तीनों परानू बाबा के मेले में पहुंच गईं। पुलिस की लगातार निगरानी के कारण उन्हें वहीं से सकुशल बरामद कर लिया गया।
पुलिस की तत्परता ने टाला बड़ा खतरा
तीन नाबालिग छात्राओं के एक साथ घर छोड़ने की सूचना पर शंकरगढ़ पुलिस ने जिस तेजी से कार्रवाई की, उससे किसी संभावित अनहोनी की आशंका टल गई। लोकेशन की लगातार निगरानी से पुलिस को छात्राओं की गतिविधियों का पता चलता रहा और आखिरकार उन्हें सुरक्षित बरामद कर लिया गया। थाना प्रभारी सुशील कुमार दुबे ने बताया कि तीनों छात्राओं को थाने लाकर आवश्यक पूछताछ की गई है। जरूरी लिखा-पढ़ी के बाद उन्हें उनके परिजनों के सुपुर्द किया जाएगा।
बदलती सोच का संकेत, संवाद की जरूरत
यह घटना मौजूदा पीढ़ी के बदलते व्यवहार और बच्चों के साथ पारिवारिक संवाद की जरूरत की ओर भी इशारा करती है। पढ़ाई को लेकर अनुशासन जरूरी है, लेकिन लगातार डांट-डपट या मारपीट के बजाय बच्चों की परेशानी और भावनाओं को समझना भी उतना ही जरूरी है। किशोरावस्था में बच्चे कई बार आवेश में ऐसे फैसले ले लेते हैं, जिनके परिणाम गंभीर हो सकते हैं। ऐसे में परिवार और बच्चों के बीच विश्वास और खुला संवाद किसी भी संकट को जन्म लेने से पहले रोक सकता है।
