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‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ से राजस्थान रचेगा नया इतिहास, युवा शक्ति ही लोकतंत्र की असली संवाहक: राजेश्वर सिंह

रमेश सर्राफ धमोरा / जयपुर

जयपुर स्थित प्रसिद्ध महारानी महाविद्यालय में आज राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान के तत्वावधान में ‘मतदाता जागरूकता, संवैधानिक मूल्य एवं लोकतांत्रिक सहभागिता’ विषय पर एक प्रेरणादायी विशेष व्याख्यान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह रहे।
समारोह का औपचारिक शुभारंभ महारानी कॉलेज की प्राचार्या प्रो. नूपुर माथुर के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने अतिथियों का आत्मीय अभिनंदन करते हुए छात्राओं को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में जागरूक एवं सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया। तत्पश्चात प्रो. सुधीर सोनी ने मतदान के महत्व, मतदाता के अधिकारों, पंजीकरण प्रक्रिया तथा निष्पक्ष चुनाव की संवैधानिक पृष्ठभूमि पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए छात्राओं को चुनावी प्रक्रिया की बारीकियों से अवगत कराया।
मुख्य वक्ता के रूप में महारानी कॉलेज की छात्राओं को संबोधित करते हुए राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने वर्तमान में प्रस्तावित नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव की विस्तृत रूपरेखा साझा की। उन्होंने एक ऐतिहासिक एवं गौरवपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि राजस्थान देश में ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ की शुरुआत करने जा रहा है, जो संपूर्ण प्रदेश के लिए अत्यंत गर्व का क्षण है।
आयुक्त ने स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक व्यवस्था के तहत राज्य में नगरीय निकाय चुनाव दो चरणों में तथा त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव चार चरणों में निष्पक्ष, पारदर्शी एवं सुरक्षित तरीके से संपन्न कराए जाएंगे।
1952 से 2026: भारतीय लोकतंत्र की गौरवशाली संवैधानिक यात्रा
राज्य निर्वाचन आयुक्त ने भारतीय लोकतंत्र के संवैधानिक सफर पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 26 जनवरी 1950 को भारत के गणतांत्रिक स्वरूप की आधारशिला रखी गई थी। वर्ष 1952 के प्रथम आम चुनाव से शुरू हुई यह लोकतांत्रिक यात्रा आज वर्ष 2026 में अपने पूर्ण परिपक्व और सुदृढ़ स्वरूप में विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में स्थापित है।
उन्होंने रेखांकित किया कि संसद द्वारा पारित 73वें और 74वें संविधान संशोधन के माध्यम से ही राज्य निर्वाचन आयोगों का गठन संभव हुआ, जिसने स्थानीय स्वशासन एवं पंचायती राज को धरातल पर मजबूती प्रदान की। इस अवसर पर उन्होंने महात्मा गांधी, संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर, स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू तथा मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे प्रबुद्ध, समर्पित एवं दूरदर्शी राष्ट्रनिर्माताओं के योगदान को नमन किया।
उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे अनिवार्य रूप से अपने मताधिकार का प्रयोग करें और योग्यतम जनप्रतिनिधि का चुनाव कर राष्ट्र निर्माण में प्रभावी भूमिका निभाएं।
युवा पीढ़ी की लोकतंत्र में महती भूमिका को रेखांकित करते हुए आयुक्त ने छात्राओं से कहा, “आपका प्रत्येक वोट अत्यंत कीमती और पवित्र है। इस एक वोट की शक्ति से आप देश और समाज की पूरी दिशा बदल सकते हैं। यदि आप देश और दुनिया में सकारात्मक, स्थायी और व्यापक बदलाव चाहते हैं, तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय सहभागिता ही एकमात्र शक्तिशाली माध्यम है।”
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में साहस, संकल्प और संगठन की प्रवृत्ति से ही राजनीतिक जागरूकता का संचार होगा, जिससे अंततः सशक्त राष्ट्र का निर्माण होगा। वक्तव्य के दौरान आयुक्त ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की प्रेरणादायी ओजस्वी पंक्तियों का पाठ कर छात्राओं में देशप्रेम और लोकतांत्रिक दायित्वबोध का नया उत्साह भर दिया। उन्होंने अपील की कि युवाओं को हमेशा निष्ठावान, प्रतिबद्ध और कर्मठ जनप्रतिनिधियों का ही चुनाव करना चाहिए।
सामाजिक समानता और समरसता पर बल देते हुए राजेश्वर सिंह ने कहा कि एक आदर्श समाज और समर्थ देश का निर्माण तभी संभव है, जब नर और नारी दोनों को बिना किसी भेदभाव के समान अधिकारों का प्रयोग करने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का सबसे उज्ज्वल और प्रभावकारी स्वरूप तभी सामने आ सकता है, जब हमारे राजनीतिक नेताओं का व्यक्तित्व, कृतित्व और चरित्र उच्च कोटि का, अनुकरणीय तथा उत्तम हो।
वर्तमान सामाजिक ताने-बाने की चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आज शिक्षा, चिकित्सा और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे बुनियादी विषयों के प्रति समाज और व्यवस्था को अधिक गंभीर होना पड़ेगा।
शिक्षा का परम उद्देश्य और वैचारिक पुनर्जागरण
विद्यार्थियों की भूमिका को परिभाषित करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा का परम उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं है, बल्कि पढ़-लिखकर देश और समाज की ज्वलंत समस्याओं के प्रति गहराई से चिंतन, मनन और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण विकसित करना है।
देश की समृद्ध संस्कृति, कला और साहित्य के संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में अध्ययन, चिंतन, मनन और वैचारिक विश्लेषण का स्वस्थ परिवेश निर्मित करने का आह्वान किया, जिससे भारत निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर हो सके।

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