राजेश सरकार / प्रयागराज
पत्थर गिरजाघर से शहीद वॉल तक निकली तिरंगा यात्रा में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य समेत भाजपा के कई जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। हाथों में तिरंगा और राष्ट्रभक्ति के नारों के बीच निकली यात्रा ने शहर में देशभक्ति का माहौल बनाया, लेकिन इसके साथ ही इसे लेकर सियासी बहस भी तेज हो गई है।
भाजपा ने तिरंगा यात्रा को राष्ट्रप्रेम और शहीदों के सम्मान से जोड़कर अपनी राजनीति का हिस्सा बनाया है। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा राष्ट्रवाद और देशभक्ति के प्रतीकों का सबसे ज्यादा राजनीतिक इस्तेमाल करना जानती है और चुनावी राजनीति में इसका लाभ लेने की कोशिश करती रही है। विपक्षी दलों का कहना है कि राष्ट्रभक्ति किसी एक दल की जागीर नहीं है, लेकिन भाजपा इसे अपने राजनीतिक अभियान का प्रमुख चेहरा बनाने में सफल रही है।
भाजपा की लगातार तिरंगा यात्राओं और राष्ट्रवादी आयोजनों को देखकर विपक्ष भी रणनीति पर सवाल उठा रहा है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों से ध्यान हटाकर राष्ट्रवाद के भावनात्मक मुद्दे को आगे किया जा रहा है। वहीं, भाजपा का तर्क है कि तिरंगा और देशभक्ति को राजनीति के चश्मे से देखना ही विपक्ष की सोच को उजागर करता है।
प्रयागराज की इस यात्रा में उमड़ी भीड़ और लहराते तिरंगों ने एक बार फिर यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि राष्ट्रवाद का राजनीतिक नैरेटिव आखिर किसके पक्ष में जा रहा है और विपक्ष उसकी काट क्यों नहीं तलाश पा रहा है। फिलहाल, तिरंगा यात्रा सड़क पर देशभक्ति का संदेश देती नजर आई, जबकि उसके पीछे की राजनीति को लेकर सियासी गलियारों में बहस जारी है।
