रिश्ता आस नहीं रखता,
विश्वास की बुनियाद पर टिका मिलता है सुघड़ रिश्ता।
जिसमें ‘संदेह’ की गुंजाइश न हो,
वही तो है खालिस रिश्ता।
स्नेह पाने से अधिक
स्नेह उड़ेलना है बेहतरीन रिश्ता।
करीब न सही, दूर रहकर भी
जो दिल धड़काता हो,
जो याद में रम जाता हो,
ये कुछ और नहीं…
है एक अद्भुत रिश्ता।
चाहे लहू का न हो,
जज्बात का अहसास है
एक मधुर रिश्ता।
किसी बंधन में बंधा रिश्ता
टिक नहीं पाता अधिक देर।
वो रिश्ता… खुशी से ज्यादा
अहमियत रखता है
दर्द का रिश्ता।
-त्रिलोचन सिंह अरोरा
