अनिल मिश्र / पटना
आज जब हमारा मुल्क अपनी आजादी का जश्न मना रहा है, तो ‘दैनिक संगम’ के तमाम पाठकों को यौमे आजादी की दिली मुबारकबाद! 15 अगस्त महज कैलेंडर में दर्ज एक तारीख नहीं है, बल्कि यह उन अनगिनत कुर्बानियों, संघर्षों और शहादतों का मुकद्दस प्रतीक है, जिनकी बदौलत आज हम एक आजाद और जम्हूरी (लोकतांत्रिक) फिजा में सांस ले रहे हैं।
आज का दिन मुल्क के उन अजीम रहनुमाओं और मुजाहिदीन-ए-आजादी (स्वतंत्रता सेनानियों) को खिराज-ए-अकीदत पेश करने का है, जिन्होंने अपना सब कुछ वतन के नाम कर दिया। आजादी की इस अजीम जद्दोजहद में हमारे सूबे बिहार का किरदार हमेशा सुनहरे हर्फों में याद रखा जाएगा। चंपारण के सत्याग्रह से लेकर 1942 की अगस्त क्रांति तक, बिहार की मिट्टी ने हमेशा आजादी की मशाल जलाकर मुल्क को दिशा दिखाई है।
लेकिन, यौमे आजादी सिर्फ तिरंगा फहराने का दिन नहीं है; यह मुहासिबा (आत्ममंथन) करने का भी दिन है। आजादी के इतने दशकों बाद, आज हमें यह सोचना होगा कि क्या आजाद भारत का वह ख्वाब पूरा हो पाया है, जो हमारे मुजाहिदीन ने देखा था? आजादी का असल मतलब सिर्फ हुकूमत बदल जाना नहीं है, बल्कि अवाम को गरीबी, जहालत, नफरत और बेरोजगारी जैसी जंजीरों से आजाद कराना है।
आज जब हम आजादी का जश्न मना रहे हैं, तब भी हमारे देश और सूबे का युवा बेरोजगारी के बोझ तले दबा हुआ है। हर साल लाखों नौजवान डिग्रियां लेकर सड़कों पर भटकने को मजबूर हैं। जब तक हमारे युवाओं को आजीविका और सम्मानजनक रोजगार की गारंटी नहीं मिलती, तब तक आजादी का यह जश्न अधूरा ही रहेगा।
इसके साथ ही, इस देश की इमारत जिस मजदूर वर्ग के पसीने पर खड़ी है, आज उनके अधिकारों की अनदेखी हो रही है। कारखानों, खेतों और असंगठित क्षेत्रों में दिन-रात मेहनत करने वाले मजदूरों को सही मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा और न्याय मिलना ही उनके लिए सच्ची आजादी होगी। मजदूरों के हक की हिफाजत करना किसी भी जम्हूरी सरकार की बुनियादी जिम्मेदारी है।
जम्हूरियत (लोकतंत्र) की मजबूती के लिए प्रेस की आजादी (सहाफत की स्वतंत्रता) रीढ़ की हड्डी की तरह है। लोकतंत्र का यह चौथा स्तंभ तभी तक मजबूत है, जब तक मीडिया बिना किसी दबाव, डर या लालच के बेबाकी से सच को सामने रख सके। आज के दौर में जब निष्पक्ष पत्रकारिता पर कई तरह के दबाव हैं, तब ‘दैनिक संगम’ अपनी इस प्रतिबद्धता को दोहराता है कि हम हमेशा अवाम की आवाज, मजदूरों के दर्द और हुकूमत से सवाल पूछने की अपनी अखलाकी (नैतिक) जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाते रहेंगे।
आइए, इस मुबारक मौके पर हम सब मिलकर यह अहद (संकल्प) लें कि हम अपने संविधान और उसकी जम्हूरी कदरों की हर हाल में हिफाजत करेंगे। हम एक हैं। हर हाथ को काम मिले, हर कलम को आजादी मिले और तरक्की की रोशनी समाज की आखिरी कतार में खड़े शख्स तक पहुंचे।
जय हिंद! जय भारत!
