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तलाक की अर्जी ने ले ली जान- बैंक गेट पर पत्नी को मारी गोली, घर में बहन की हत्या

डॉ. मंगलेश्वर त्रिपाठी / लखनऊ

गुरुवार दोपहर राजधानी की सड़कें खून से सन गईं। एक तरफ ‘बेटी बचाओ’ के नारे, दूसरी तरफ गोमतीनगर में दिनदहाड़े एक कामकाजी बेटी को उसके पति ने बैंक के गेट पर गोलियों से भून दिया। 25 मिनट बाद उसी खून से सने हाथों ने घर में मानसिक रूप से बीमार बहन की भी हत्या कर दी और आखिर में खुद की जिंदगी भी खत्म कर ली। तीन लाशें, एक टूटा परिवार और दर्जनों सवाल।
दोपहर 12:05 बजे मानस बाजपेयी कार से आईसीआईसीआई बैंक की गोमतीनगर शाखा पहुंचा। फोन किया और पत्नी दिव्या मिश्रा को बाहर बुलाया। दिव्या आईसीआईसीआई बैंक में असिस्टेंट मैनेजर थीं। वह यूट्यूबर प्रज्ञा मिश्रा की छोटी बहन थीं। 12 साल का रिश्ता था, लेकिन एक साल से दोनों अलग रह रहे थे। दिव्या ने तलाक की अर्जी लगा दी थी और आलमबाग में अकेले रह रही थीं।
बैंक के गेट पर थोड़ी बहस हुई और फिर ताबड़तोड़ दो गोलियां चल गईं। दिव्या जमीन पर गिर पड़ीं। ग्राहक चीखे, गार्ड भागे और मानस कार लेकर फरार हो गया।
12:30 बजे वह हुसड़िया चौराहे स्थित अपने किराए के कमरे में पहुंचा। पसीने से तर-बतर मानस ने दरवाजा बंद किया। टीवी पर हनुमान चालीसा तेज कर दी और फिर अपनी 28 वर्षीय बहन शीबा के सीने में गोली उतार दी। शीबा मानसिक रूप से बीमार थी और उसका इलाज चल रहा था। मानस को डर था, “मेरे बाद इसका क्या होगा?” इसके बाद उसने अपनी कनपटी पर पिस्टल रखकर अपनी इहलीला भी समाप्त कर ली।
पड़ोसियों ने जब दरवाजा तोड़ा तो अंदर भाई-बहन की लाशें और मेज पर एक कागज पड़ा था। सुसाइड नोट में लिखा था, “मैंने पत्नी को मार दिया, क्योंकि उसने धोखा दिया। अब खुद को और बहन को भी मारना है। दिव्या की बहन प्रज्ञा और जीजा भरत यादव सब जानते हैं।”
मानस एसबीआई की इंजीनियरिंग कॉलेज शाखा में फील्ड ऑफिसर था। माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका था। दुनिया में उसके साथ सिर्फ बहन थी।
मौके पर पुलिस कमिश्नर तरुण गाबा पहुंचे। फोरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए।
लेकिन सवाल कौन पूछेगा?
गोमतीनगर वीआईपी इलाका है। बैंक में गार्ड भी तैनात था। फिर भी दो पिस्टल लेकर एक शख्स अंदर तक कैसे पहुंचा? एक साल से अलग रह रही महिला को एक बार भी सुरक्षा नहीं दी गई?
दिव्या की लाश बैंक के गेट पर पड़ी थी। शीबा की लाश कमरे में। और सिस्टम? सिस्टम फाइलों में ‘जांच जारी’ लिख रहा है।
क्या यही है ‘सेफ सिटी’ लखनऊ? जहां तलाक की एक अर्जी तीन जिंदगियां निगल जाती है?

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