मुख्यपृष्ठनए समाचार‘डेडलाइन’ के लिए सुरक्षा की बलि!

‘डेडलाइन’ के लिए सुरक्षा की बलि!

 -संजय गांधी नेशनल पार्क के नीचे मंडराता खतरा
-मनपा के सुस्त काम पर उठे गंभीर सवाल, मैनपावर की भारी कमी

द्रुप्ति झा / मुंबई

मनपा की महत्वाकांक्षी योजना गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (जीएमएलआर) का फेज ३ (बी) अब प्रशासनिक ढिलाई और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण विवादों में घिरता नजर आ रहा है। गोरेगांव पूर्व में स्थित दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी से मुलुंड-पश्चिम के अमर नगर के बीच संजय गांधी नेशनल पार्क की बेहद संवेदनशील जमीन के नीचे से गुजरने वाले इस प्रोजेक्ट की धीमी रफ्तार और तकनीकी कमियों ने सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रोजेक्ट के काम के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी
टनल बोरिंग मशीन द्वारा ५.३० किलोमीटर की खुदाई के बावजूद काम की गति और मजदूरों की सुरक्षा को लेकर भारी अनियमितताएं सामने आ रही हैं। हवा की गुणवत्ता और माइनिंग सुरक्षा को लेकर मानकों का कड़ाई से पालन नहीं हो पा रहा है। अधिकारियों द्वारा साइट निरीक्षण के दौरान प्रोजेक्ट में मैनपावर की भारी कमी और तकनीकी असंतुलन खुलकर सामने आया, जिसके बाद जल्दबाज़ी में अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती के आदेश जारी करने पड़े। दूसरे टनल बोरिंग मशीन की असेंबली का ३० प्रतिशत काम अब भी बाकी है। १ अक्टूबर को तय किए गए साइट एक्सेप्टेंस टेस्ट की समयसीमा नजदीक होने के कारण बिना पूरी तैयारी के काम को खींचने की कोशिश की जा रही है, जो भविष्य में बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा
संजय गांधी नेशनल पार्क के ठीक नीचे बिना पुख्ता सुरक्षा और माइनिंग कंट्रोल के की जा रही खुदाई से आसपास के पारिस्थिकी तंत्र पर विपरीत असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। चीफ इंजीनियर (पुल) राजेश मुले और अन्य सलाहकारों की मौजूदगी में हुए इस निरीक्षण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मनपा प्रशासन समयसीमा पूरी करने के दबाव में सुरक्षा तंत्र से समझौता कर रहा है। जनता के करोड़ों रुपये के बजट से बन रहे इस प्रोजेक्ट में यदि तुरंत कड़े सुरक्षा उपाय नहीं लागू किए गए, तो यह परियोजना मुंबईकरों के लिए एक बड़ा संकट बन सकती है।

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