-बोले, गुजरात की कंपनियों के बिल पास तो महाराष्ट्र का क्यों नहीं?
-एक और ठेकेदार ने तोड़ा दम, भड़का विपक्ष
– रोहित पवार ने महायुति को जमकर घेरा
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में सरकारी ठेकेदारों के लंबित भुगतान का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक रूप से गरमा गया है। बकाया बिलों के कारण आर्थिक और मानसिक तनाव में सरकारी ठेकेदार गजानन देवकाते द्वारा आत्महत्या किए जाने की खबर के बाद विपक्ष ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। ठेकेदारों की बदहाली और उनके मेहनत के पैसे नहीं दिए जाने को लेकर परेशान ठेकेदार आत्महत्या कर रहे हैं। एक दिन पहले एक और ठेकेदार ने आत्महत्या की। जिसे लेकर विपक्ष सरकार पर आक्रामक हो गया। विपक्ष ने आरोप लगाया है गुजरात और आंध्र प्रदेश की कंपनियों के भुगतान पहले किये जा रहे हैं जब कि राज्य के ठेकेदारों का बिल पेंडिंग रखा जा रहा है।
एनसीपी नेता रोहित पवार ने सवाल उठाया कि जब संवैधानिक तरीके से बार-बार मांग करने के बावजूद सरकार ठेकेदारों के लंबित बिलों का भुगतान नहीं करती और कथित तौर पर आर्थिक संकट के कारण एक ठेकेदार आत्महत्या करने को मजबूर हो जाता है, तो सरकार के खिलाफ ही सदोष हत्या का मामला क्यों दर्ज नहीं किया जाना चाहिए? रोहित पवार ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि गुजरात और आंध्र प्रदेश के ठेकेदारों के करोड़ों रुपए के बिल तत्काल अदा किए जाते हैं, लेकिन महाराष्ट्र के मराठी ठेकेदारों के भुगतान वर्षों से अटके हुए हैं।
कब मिलेगा ठेकेदारों के ९० हजार करोड़ रुपए बकाया?
रोहित पवार की ओर से दावा किया जा रहा है कि सरकारी ठेकेदारों के करीब ९० हजार करोड़ रुपए के भुगतान लंबित हैं। इसी बकाये को लेकर सरकार की वित्तीय व्यवस्था और ठेकेदारों के प्रति उसके रवैये पर सवाल उठाए जा रहे हैं। बता दें कि सरकारी ठेकेदारों के लंबित बिलों का मुद्दा पिछले कुछ समय से विपक्ष लगातार उठा रहा है।
