शीतल अवस्थी
रक्षाबंधन के दिन श्रवण नक्षत्र के समय महिलाएं परंपरानुसार, घर के बाहर गाय के गोबर व लाल गेरू से श्रवण कुमार की आकृति बनाकर पूजन कर उन पर राखी अर्पित करें। सुख-समृद्धि के लिए यह पूजन किया जाता है। महिलाएं एवं पुरोहित सुबह स्नान करके सूर्य को तांबे के बर्तन से अर्ध्य अर्पित करें। दोपहर बाद सूती, रेशमी या पीले कपड़े में चावल, केशर, चंदन, सरसों व दूर्वा रखकर एक पोटली (रक्षा पोटलिका) बनाएं और उसे एक तांबे के लोटे में रखकर भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित कर दें। फिर लाल कलावा (पूजा में उपयोग आने वाला पवित्र धागा) लेकर गंगाजल, हल्दी व केशर से पवित्र करें तथा अपने इष्ट देव का ध्यान करते हुए घर के मुख्य द्वार पर बांध दें। इसके बाद बहनें भाइयों का कुल परंपरानुसार आरती कर तिलक निकालें तथा मिठाई खिलाकर दाहिनी कलाई पर राखी बांधें तथा शगुन स्वरूप रूमाल इत्यादि भेंट करें। भाई भी अपनी शक्ति के अनुसार बहनों को उपहार दें। इस प्रकार रक्षाबंधन का पर्व मनाने से घर में खुशहाली आती है। राखी बांधने से पूर्व अपने इष्ट देव का स्मरण अवश्य करें।
रक्षाबंधन पर ये है जरूरी
भाई और बहन के लिए रक्षाबंधन एक महापर्व की तरह है। राखी बांधने से पहले एक विशेष थाली सजाई जाती है। इस थाली में ७ खास चीजें होनी चाहिए।
कुमकुम- किसी भी शुभ काम की शुरुआत कुमकुम का तिलक लगाकर की जाती है। ये परंपरा बहुत पुरानी है और आज भी इसका पालन किया जाता है। तिलक मान-सम्मान का भी प्रतीक है। बहन तिलक लगाकर भाई के प्रति सम्मान प्रकट करती है। साथ ही, अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर बहन उनकी लंबी उम्र की कामना भी करती है। इसलिए थाली में कुमकुम विशेष रूप से रखना चाहिए।
अक्षत- तिलक लगाने बाद तिलक के ऊपर अक्षत (चावल) भी लगाए जाते हैं। चावल को अक्षत कहा जाता है। इसका अर्थ है अक्षत यानी जो अधूरा न हो। तिलक के ऊपर चावल लगाने का भाव यह है कि भाई के जीवन पर तिलक का शुभ असर हमेशा बना रहे।
नारियल- बहन अपने भाई को तिलक लगाने के बाद हाथ में नारियल देती है। नारियल को श्रीफल कहा जाता है। यह सुख-समृद्धि का प्रतीक है। बहन भाई को नारियल देकर यह कामना करती है कि भाई के जीवन में सुख और समृद्धि हमेशा बनी रहे।
राखी- रक्षा सूत्र बांधने से त्रिदोष शांत होते हैं। त्रिदोष यानी वात, पित्त और कफ। हमारे शरीर में कोई भी बीमारी इन दोषों से ही संबंधित होती है। रक्षा सूत्र कलाई पर बांधने से शरीर में इन तीनों का संतुलन बना रहता है। ये धागा बांधने से कलाई की नसों पर दबाव बनता है, जिससे ये तीनों दोष निंयत्रित रहते हैं। रक्षा सूत्र का अर्थ है, वह सूत्र (धागा) जो हमारे शरीर की रक्षा करता है। दरअसल, राखी बांधने का एक मनोवैज्ञानिक पक्ष भी है। बहन राखी बांधकर अपने भाई से उम्र भर रक्षा करने का वचन लेती हैं। भाई को भी ये रक्षा सूत्र इस बात का अहसास करवाता रहता है कि उसे हमेशा बहन की रक्षा करनी है।
मिठाई- राखी बांधने के बाद बहन अपने भाई को मिठाई खिलाकर उसका मुंह मीठा करती है। मिठाई खिलाना इस बात का प्रतीक है कि बहन और भाई के रिश्ते में कभी कड़वाहट न आए, मिठाई की तरह यह मिठास हमेशा बनी रहे।
दीपक- राखी बांधने के बाद बहन दीपक जलाकर भाई की आरती भी उतारती है। इस संबंध में मान्यता है कि आरती उतारने से सभी प्रकार की बुरी नजरों से भाई की रक्षा हो जाती है। आरती उतारकर बहन कामना करती है कि भाई हमेशा स्वस्थ और सुखी रहे।
जल से भरा कलश- राखी की थाली में जल से भरा हुआ एक कलश भी रखा जाता है। इसी जल को कुमकुम में मिलाकर तिलक लगाया जाता है। हर शुभ काम की शुरुआत में जल से भरा कलश रखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसी कलश में सभी पवित्र तीर्थों और देवी-देवताओं का वास होता है। इस कलश की प्रभाव से भाई और बहन के जीवन में सुख और स्नेह हमेशा बना रहता है।
