मुख्यपृष्ठनए समाचारमहायुति का गड़बड़ कारभार!

महायुति का गड़बड़ कारभार!

-दांव पर छात्रों का भविष्य, एमपीएससी के मूल्यांकन पर उठे गंभीर सवाल
-पेपर लीक के बाद अब अंकों में कथित असामान्य अंतर से मचा हड़कंप; भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल

सामना संवाददाता / मुंबई

राज्य की महायुति सरकार की कथित गड़बड़ नीतियों का खामियाजा आम छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। एमपीएससी की परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के मूल्यांकन से सामने आई तस्वीर ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एफडीए में औषधि निरीक्षक पद की परीक्षा में पेपर लीक के विवाद के बाद अब राज्यसेवा मुख्य परीक्षा के परिणाम और उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर भी विद्यार्थियों ने सवाल उठाए हैं। छात्रों का आरोप है कि अंकों में असामान्य अंतर दिखाई दे रहा है, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ गई है।
भाषा के पेपर ने बढ़ाई बेचैनी
सबसे गंभीर सवाल अनिवार्य मराठी और अंग्रेजी भाषा के क्वालीफाइंग पेपर को लेकर उठ रहे हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि मुख्य परीक्षा के अन्य विषयों में अच्छे अंक प्राप्त करने के बावजूद कुछ उम्मीदवार मामूली अंतर से क्वालीफाइंग पेपर में असफल घोषित कर दिए गए। कुछ उम्मीदवारों को आवश्यक ७५ अंक भी नहीं मिल सके, जिसके चलते उनका साक्षात्कार का रास्ता बंद हो गया।
रोहित पवार ने सरकार को घेरा
एनसीपी नेता रोहित पवार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महाराष्ट्र के मेहनती युवाओं को नौकरी मिलेगी या नहीं, यह सवाल बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि हर परीक्षा के बाद विद्यार्थियों को कथित गड़बड़ी और जांच के चक्र में उलझना पड़ रहा है।
प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर लगातार सामने आ रहे विवादों ने भर्ती व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कहीं २ अंक, तो कहीं १५० पार!
विद्यार्थियों के मुताबिक, २५० अंकों के पेपर में कुछ उम्मीदवारों को २, ६, ११ और १४ जैसे बेहद कम अंक मिले हैं, जबकि कुछ उम्मीदवारों को १५० से अधिक अंक प्राप्त हुए हैं। निबंध और सामान्य अध्ययन के पेपरों में भी अंकों में बड़े अंतर का दावा किया जा रहा है। वैकल्पिक विषयों में भी एक पेपर में अच्छे अंक और दूसरे में बेहद कम अंक मिलने की शिकायतें सामने आई हैं।

अन्य समाचार