-‘गुरुजन का सम्मान उनके द्वार’ की परम्परा के अनुरूप कुलपतियों के कार्यालय एवं आवास पर पहुंचकर पंचविधि से किया सम्मान
उमेश गुप्ता / वाराणसी
शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर रोटरी क्लब वाराणसी द्वारा अपनी गौरवशाली परम्परा के अनुरूप वाराणसी स्थित प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों के कुलपतियों का ‘सर्वपल्ली राधाकृष्णन अलंकरण-2026’ से पंचविधि सम्मान किया गया।
रोटरी क्लब वाराणसी ने महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी के उस सिद्धांत को आत्मसात करते हुए कि “विद्वान एवं गुरुजनों का सम्मान करना हो तो उनके चौखट/द्वार पर जाकर ही कीजिए”, कुलपतियों के कार्यालय एवं आवास पर पहुंचकर उन्हें सम्मानित किया।
इस अवसर पर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी जी, सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा जी, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. अजीत कुमार चतुर्वेदी जी तथा तिब्बतन उच्च शिक्षा संस्थान के कुलपति भिक्षु प्रो. (डॉ.) वंगछुग दोर्जे नेगी जी को रोली-अक्षत तिलक, साफा-पगड़ी, अंगवस्त्रम, पुष्पमाला, मिष्ठान एवं स्मृति-उपहार अर्पित कर सादर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को अपने माता-पिता के साथ-साथ गुरुजनों का भी सम्मान करना चाहिए तथा विद्या-अध्ययन के केंद्र को देवालय के समान आदर देना चाहिए।
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि यदि युवा और विद्यार्थी सनातन संस्कृति एवं संस्कृत को अपने जीवन में अंगीकार कर लें तो भारत को विश्वगुरु बनने से कोई रोक नहीं सकता। उन्होंने “जयतु भारत” का संदेश दिया।
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने जीवन में सिद्धांतों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्र के संविधान के अनुरूप आचरण करना चाहिए। उन्होंने समय के सम्मान तथा सनातन के वास्तविक एवं मानवीय मूल्यों को जीवन में आत्मसात करने पर विशेष बल दिया।
तिब्बतन उच्च शिक्षा संस्थान के कुलपति भिक्षु प्रो. (डॉ.) वंगछुग दोर्जे नेगी ने रोटरी क्लब की इस परम्परा की सराहना करते हुए कहा कि गुरु का सम्मान केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि ज्ञान, शिक्षा और संस्कारों की पूरी परम्परा का सम्मान है। उन्होंने कहा कि भारत और तिब्बती परम्परा दोनों में गुरु-शिष्य संबंध को अत्यंत पवित्र माना गया है। आज के समय में जब युवा पीढ़ी तीव्र गति से बदलती दुनिया के साथ आगे बढ़ रही है, ऐसे अवसर उन्हें अपनी जड़ों, संस्कारों और ज्ञान की परंपरा से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक संवेदनशील, अनुशासित और जिम्मेदार नागरिक का निर्माण करना है। उन्होंने रोटरी क्लब वाराणसी को इस अभिनव एवं प्रेरणादायी परम्परा को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए साधुवाद दिया।
कार्यक्रम में क्लब के निवर्तमान अध्यक्ष रो. मनोरंजन अग्रवाल एवं पूर्व अध्यक्ष रो. मनीष खत्री द्वारा कुलपति गण को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया, जबकि क्लब सचिव रो. नवीन सेठ द्वारा तिलक-अक्षत लगाकर अंगवस्त्रम अर्पित किया गया। कार्यक्रम का सफल समन्वयन एवं संचालन पूर्व अध्यक्ष रो. मनीष खत्री द्वारा किया गया।
इस विशेष अवसर पर पूर्व अध्यक्ष रो. डॉ. अजीत सैगल, कार्यक्रम सह-संयोजक रो. अशरफ अली एवं रो. आदित्य दुबे, पूर्व अध्यक्ष रो. डॉ. अनिल ओहरी, रो. इरफान मिर्जा, रो. संदीप पंड्या, रो. राजन यादव, रो. मुदित अग्रवाल, रो. डॉ. राम नारायण यादव सहित रोटरी क्लब वाराणसी के अनेक प्रतिष्ठित सदस्य उपस्थित रहे।
