मुख्यपृष्ठस्तंभतरकश :  खासियतें ही बता देती हैं कितने खास हैं मोदी जी

तरकश :  खासियतें ही बता देती हैं कितने खास हैं मोदी जी

धनुर्धर

अपने पीएम मोदी जी कितने खास हैं, इसका अहसास आप दर्जनों तरीकों से कर सकते हैं। खुद मोदी जी भी इसके अनेकानेक तरीके बता चुके हैं। मिसाल के तौर पर यह कि उन्हें रोज कितने किलो गालियां मिलती हैं खाने को। यह भी कि वैâसे वे रोज सिर्फ चार घंटे ही सोते हैं और १८-१८ घंटे काम करते हैं। यह मत पूछिए कि वे इन १८ घंटों में करते क्या हैं। असल में आराम के उनके घंटे भी इन्हीं १८ घंटों में शामिल हैं। इस पर वही हैरत जता सकता है, जिसे मालूम न हो कि मोदी जी जैसी शख्सियत का होना ही इतना अहम है कि उनके लिए सारी परिभाषाएं जब चाहें बदली जा सकती हैं।
एहसान तो करते हैं
अब काम करने का मतलब होता है कुछ करना। और मोदी जी जब आराम कर रहे होते हैं, तब भी वह देश-दुनिया पर एहसान तो कर ही रहे होते हैं। जाने-अनजाने दुनिया को बड़ी राहत दे रहे होते हैं। जिस तरह के खतरनाक पैâसले वे चुटकियों में ले लेते हैं, सोचिए उनके आराम के वे पल नहीं होते तो उन पलों में अपने फैसलों से देश-दुनिया का कितना नुकसान वे कर सकते थे।
५६ इंच का…
बहरहाल, बात हो रही थी मोदी जी के खास होने की। तो वे तो तब से खास हैं जब वे नरेंद्र नहीं, बाल नरेंद्र थे। बचपन में ही चाय बेचने से लेकर उनके तमाम प्रसंगों पर पर्याप्त साहित्य दुनिया को उपलब्ध कराया जा चुका है। ५६ इंच की अपनी छाती का ब्योरा वे खुद सबको दे चुके हैं। यह अलग बात है कि जेन-जी के कुछ खुराफाती बच्चे अपनी कल्पना के जरिए ५६ इंच का छोटा बंदर भी उठा लाए कहीं से। बाल नरेंदर की ही महिमा कहिए कि यह छोटा बंदर भी मिनटों में ऐसा वायरल हुआ कि पूरी दुनिया उसके बारे में जान गई।
मोदी चालीसा
वे बायोलॉजिकल हैं या नॉन बायोलॉजिकल यह विवाद फिलहाल छोड़ भी दें तो यह तथ्य तो निर्विवाद है कि उनकी महिमा बखानते हुए मोदी चालीसा का भी सार्वजनिक पाठ किया जा चुका है। कभी श्रीयुत लालू प्रसाद यादव के नाम ही यह रेकॉर्ड था कि उनके पैंâस लालू चालीसा का सगर्व पाठ करते हैं। इस अमृत काल में हर रिकॉर्ड मोदी जी के नाम के साथ जुड़ने को करीब-करीब अभिशप्त है। लिहाजा, मोदी चालीसा का पाठ होना ही था। अलबत्ता यह नहीं पता था कि इस बड़े और नेक काम के लिए प्रेस क्लब ऑफ इंडिया सभागार को चुना जाएगा।
घोषणा से पहले अमल
ये सब बातें एक तरफ। मोदी जी के व्यक्तित्व की शान में चार चांद लगानेवाली घटना इन सबसे कहीं आगे की है। इस घटना को अंजाम देने वाले कोई और नहीं, मोदी जी के खूंखार भक्त ही हैं। ये भक्त इतने समर्पित हैं कि मोदी जी किसी समस्या को पहचानकर उसका उपाय बताएं, उससे पहले ही उस उपाय को जमीन पर लागू कर आते हैं। मिसाल के तौर पर, मोदी जी ने दिमागी नक्सल को पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने की जरूरत बताई थी १५ अगस्त को लाल किले से दिए अपने भाषण में। लेकिन उनके भक्तों ने २० जुलाई को जेन-जी के संसद मार्च के दौरान ही अपने स्तर पर इन दिमागी नक्सलों से निपटने की कार्रवाई शुरू कर दी थी।
दिमाग से एलर्जी
इसका खुलासा हाल में ऐसे ही एक समर्पित भक्त ने किया, जो उन्हें अपना बड़ा भाई बताता है। इसके मुताबिक, उसने प्रोटेस्ट के दौरान ही एक दिमागी नक्सल को पहचान लिया। चूंकि उसके पास दिमाग था और भक्तों को दिमाग से एलर्जी है, इसलिए उसने ज्यादा कुछ सोचे बिना उस नक्सल के दिमाग यानी कि सिर पर सीधा वार कर दिया। फिर एक पॉडकास्ट पर खुलेआम बता भी दिया कि वैâसे पुलिस उसका बाल भी बांका नहीं कर सकती, क्योंकि उस पर कपिल मिश्रा, चिराग पासवान और नरेंद्र मोदी जैसे बड़े भाइयों का हाथ है।
जल्दबाजी जरूरी थी
चूंकि इन बड़े भाइयों का हाथ अब अदृश्य नहीं रहा, इसलिए कॉकरोच जनता पार्टी संसद मार्ग थाने पहुंच गई, इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने। यह जरूरी था। इसमें जल्दबाजी भी जरूरी थी। खुद राहुल गांधी उस लड़की को आश्वस्त कर चुके थे, जिसके बाप का सिर फाड़ने की जिम्मेदारी इस भक्त ने पॉडकास्ट पर स्वीकार की थी। राहुल एक मामले में थाने पर पहुंच चुके हैं। अब अगर दूसरे मामले में भी वही क्रेडिट ले लेंगे तो सीजेपी के नेता क्या गुइयां छीलेंगे? तो इस बार अलग मजमा लगा है। लेकिन मजमे का जो भी हो, मोदी जी का आभामंडल फीका नहीं पड़ने दिया जाएगा, चाहे भक्तों को जैसे भी और जितने भी स्टंट करने पड़ें।
(लेखक, वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार हैं।)

अन्य समाचार