मुख्यपृष्ठनए समाचारनीले गांव की अनूठी परंपरा गांव के गोप ही तोड़ते हैं मटकी

नीले गांव की अनूठी परंपरा गांव के गोप ही तोड़ते हैं मटकी

रवींद्र मिश्रा / मुंबई
गोविंदा आला रे आला जरा मटकी संभाल बृजबाला। इस फिल्मी गाने की धुन पर नाचते गाते हजारों गोंविदाओं को मुंबई सहित देश के अन्य शहरों में मटकी फोड़ते हुए अकसर देखा जाता है। लेकिन मुंबई से सटे नालासोपारा गांव में वहीं सदियों पुरानी परंपरा कायम है। यहां न तो कोई बैंड बाजा और न ही कोई अन्य तामझाम। यहां किशोर वय के लड़के ही ग्वाल बाल बनकर गांव में बांधी जानेवाली पारंपरिक मटकी को तोडते है। निलेगांव के रहने वाले समाजसेवक हंसराज पाटिल बताते हैं कि इस त्योहार के लिए हमारे गांव में चंदा वसूलने की कोई परंपरा नहीं है। पूरे गांव में १० परिवारों द्वारा उनके घर के सामने मटकी बांधी जाती है, जिसे गांव के गोविंदा सामूहिक रूप से मिल कर तोड़ते हैं। मटकी टूटते ही वे अपने पारंपरिक गीत गाते हुए नृत्य करते हैं। गांव की परंपरा के अनुसार श्री कृष्ण जन्माष्टमी दिन रात के १२ बजे गांव की बीच एक चबूतरे पर श्री कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। इस उत्सव को सफल बनाने में स्थानीय नगरसेवक जितेन्द्र पाटिल,आगरी समाज अध्यक्ष धनंजय पाटील, रमेश रामचंद्र पाटील, रमाकांत पाटील, शाखा प्रमुख हितेश घरत, रमेश महादेव पाटिल, राजेंद्र पाटील, निलेश राणे, नेता जी पाटील रमेश तिवारी, निलेश गावंड, विश्वनाथ पाटील, सुजल म्हात्रे, हार्दिक पाटिल, राकेश कदम, राष्ट्रवादी कांग्रेस के ईश्वर परमार, प्रशांत देसाई, हितेश पाटिल,अक्षय पवार, भरत पाटिल, करण कविश ने अहम् भूमिका निभाई।

अन्य समाचार