‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ इस हास्य धारावाहिक ने पिछले महीने अपने प्रसारण के १८ वर्ष पूर्ण किए, जो कि कतई आसान बात नहीं। इस दौर में ५० से अधिक कलाकारों को लेकर काम करना शायद निर्माता-निर्देशक असित मोदी ने संभव कर दिखाया। यह सीरियल एक ऐसे किरदार के इर्द-गिर्द घूमता है, जो देखने में बेहद आकर्षक लगता है। उससे मनोरंजक है उसका परफॉर्मेंस। वह किरदार है जेठालाल चंपकलाल गाड़ा (दिलीप जोशी उर्फ जेठालाल चंपकलाल गाड़ा)। फिर आते हैं जेठालाल का परिवार, उसकी दुकान, जिस सोसाइटी में वह रहता है और उसके अजीब पड़ोसी। इन सबके बीच घटने वाली हल्की-फुल्की घटनाओं की कहानी, जो आम आदमी को सोचने पर मजबूर कर देती है, गुदगुदाती है, हंस-हंस कर लोट-पोट कर देती है। इंसानी जज्बात, उनके इंसानियत, पड़ोसी धर्म जैसे कई भावनाओं को दर्शाती इस धारावाहिक के सभी कलाकारों को लेकर निर्माता असित मोदी युस तक ले गए। खैर, २/४ कलाकार इस शो के बदले लेकिन मध्यवर्ती कलाकार जेठालाल उर्फ़ दिलीप जोशी नहीं बदले।
अपनी सहज अभिनय प्रतिभा और मासूम हाव-भाव के लिए मशहूर इस अभिनेता ने अपने हर किरदार से दर्शकों का दिल जीत लिया है। दिलीप जोशी से पूजा सामंत ने की इस बातचीत के मुख्य अंश –
कैसा रहा आपके १८ वर्ष। जेठालाल बनकर? इसकी शुरुवात कैसे हुई?
मेरे करियर की शुरुआत गुजराती थिएटर से हुई। इसके बाद मुझे कई फिल्मों में सहायक भूमिकाए मिली, जिसके जरिए मेरी पहचान बनती गयी।
दिलीप जोशी का पारिवारिक पृष्ठभूमि क्या है ?
मेरा जन्म 26 मई 1968 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। मैंने मुंबई के नरसी मोंजी कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स से बी.कॉम तक की शिक्षा प्राप्त की। मेरे परिवार में उनकी पत्नी जयमाला जोशी, बेटी नियति जोशी और बेटा ऋत्विक जोशी हैं।
मुझे बचपन से ही अभिनय का बहुत शौक था। मैंने नाट्य अकादमी में दाखिला लिया। मैंने अपने करियर की शुरुआत थिएटर कलाकार के रूप में की। और 12 साल की उम्र में मंच पर अभिनय करना शुरू किया। दिलचस्प बात यह है कि मैंने पूरे नाटक में एक ही किरदार निभाया। उस नाटक में मेरी भूमिका 7-8 मिनट की थी। मेरे पहले नाटक का नाम ‘ऐ रणछोड़ रंगीला’ था।
आगे का सफर कैसा रहा?
पेशेवर थिएटर से बड़े पर्दे तक का सफर कुछ इस तरह रहा ( मैंने ने मुंबई के मशहूर पृथ्वी थिएटर में कई नाटक किए हैं। कई गुजराती नाटकों में मेरी पहचान आगे बढ़ती गयी, जिनमें से एक है सुमित राघवन और अमित मिस्त्री के साथ ‘बापू तामे कमाल करी’। यह तीनों ने अपने टीवी शो ‘शुभ मंगल सावधान’ के लिए भी जानी जाती है। इसके बाद मैंने जलसा करो जयंतीलाल’ नाटक में भी काम किया।)
स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के दौरान मैंने कई नाट्य आंदोलनों में भाग लिया। इसी दौरान मुझे सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए आईएनटी (भारतीय राष्ट्रीय रंगमंच) पुरस्कार प्राप्त हुआ।
क्या आपने फिल्मों में काम करना या नाटकों में काम करना ज्यादा पसंद किया?
दोनों के अपने चार्म है। ‘मैंने प्यार किया’, ‘फिर भी दिल है हिंदुस्तानी’ और ‘हम आपके हैं कौन’ जैसी मशहूर बॉलीवुड फिल्मों में भी नजर आए। मैंने शो ये दुनिया है रंगोली और क्या बात है में काम किया जिसमें उन्होंने एक दक्षिण भारतीय की भूमिका निभाई। राजश्री प्रोडक्शन में काम करना हमेशा से यादगार रहा। घर जैसा माहौल होता है उनके सेट्स पर। इन सभी फिल्मों में काम करना मैंने वाकई एन्जॉय किया।
मैंने प्यार किया
हुन हुंशी हुंशिलाल
हम आपके हैं कौन..!
यश सर आखो पर, फिर भी दिल है हिंदुस्थानी
खिलाड़ी 420
वन टू का फोर (वन 2 का 4)
हमराज
दिल है तुम्हारा
क्या दिल ने कहा (क्या दिल ने कहा)
फिराक
डॉन मुथु स्वामी
खोजते रह जाओगे
आपकी राशि क्या है?
तारक मेहता का उल्टा चश्मा में जेठालाल का किरदार निभाने से पहले, मैंने ने एक बॉलीवुड फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह फिल्म 2009 में रिलीज हुई थी और इसका निर्देशन आशुतोष गोवारिकर ने किया था।
फिल्म का नाम था ‘व्हॉट्स योर राशि?’। इसमें हरमन बावेजा और प्रियंका चोपड़ा ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। मैंने फिल्म में जीतू भाई का महत्वपूर्ण किरदार निभाया था। हालांकि, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा सफल नहीं रही, लेकिन मेरे हास्य अभिनय की तारीफ हुई। मैं आशुतोष गोवारिकर को मानता हू, शुक्रगुजार हूं, उन्होंने मुझ उस वक्त मौका दिया जब मेरी पहचान पुख्ता नहीं बनी थी।
जेठालाल का किरदार आपके लिए क्या मायने रखता है?
-दुनियाभर में जेठालाल मशहूर हुआ इसका बड़ा श्रेय निर्माता असित मोदी को है। तारक मेहता में काम करनेवाले सभी कलाकार मेरे घर के सदस्यों की तरह हो चुके है, यह ऐसे रिश्ते बन चुके है, जो खून से बढ़कर है।
