मुख्यपृष्ठस्तंभअमेरिका में भी ‘चोली के पीछे क्या है?'..संसद या ठरकियों का क्लब!

अमेरिका में भी ‘चोली के पीछे क्या है?’..संसद या ठरकियों का क्लब!

राजनीति का गलियारा दूर से भले ही कितना भी चकाचौंध और सिद्धांतवादी दिखे, लेकिन अंदर का सीन बिल्कुल ही ‘चोली के पीछे क्या है’ वाला है! अमरीकी संसद, कैपिटल हिल में कानून बनाने वाले माननीय सांसद महोदय लोग देश सुधारने का ठेका लिए बैठे हैं, लेकिन एक मीडिया हाउस की एक रिपोर्ट ने उनकी पोल खोलकर रख दी है।
अध्ययन के मुताबिक, दर्जनों अमरीकी सांसदों (डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन, दोनों तरफ के सूरमा!) पर यौन उत्पीड़न और गलत व्यवहार के बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। जो साहब लोग टीवी पर आकर नैतिकता का ज्ञान झाड़ते हैं, वही बंद कमरों में अपने स्टाफ और महिला कर्मचारियों पर डोरे डालने और सीमाएं लांघने में नंबर-वन निकले।
पॉवर का नशा और गंदी हरकतें
‘बॉसगीरी’ का फायदा: महिला कर्मचारी, जो दिन-रात देश की नीतियां बनाने में पसीना बहाती हैं, उन्हें अपने ही ‘पावरफुल’ आकाओं के भद्दे कमेंट्स, अनचाहे छूने और अवांछित व्यवहार का शिकार होना पड़ रहा है।
‘सब सेट है’ वाला माहौल: सबसे मजेदार बात? आरोप लगने के बाद भी ज्यादातर सांसद कुर्सी से ऐसे चिपके रहते हैं जैसे फेविकॉल का मजबूत जोड़ हो! पद, पावर और रसूख के दम पर अक्सर मामले दबा दिए जाते हैं या फिर ‘समझौते’ के नाम पर रफा-दफा कर दिए जाते हैं।
‘संसद या ठरकियों का क्लब? मामला सिर्फ एक दल का नहीं है, दोनों ही प्रमुख पार्टियों के ‘सुपरस्टार्स’ इस लिस्ट में अपनी हाजिरी लगा चुके हैं।
जनता सोचती है कि सांसद महोदय बिल पास कर रहे हैं, पर साहब लोग तो ऑफिस में ही ‘लाइन पार’ करने में बिजी हैं! यानी कुल मिलाकर बात साफ है, सफेदपोश नेताओं के जितने सफेद कुर्ते-सूट हैं, उनके कारनामे उतने ही काले। जब कानून के रखवाले ही ‘रक्षक से भक्षक’ बन जाएं, तो फिर बेचारे सिस्टम की तो लंका लगनी ही है!

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