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साइबर अपराधियों की नजर…अब हज यात्रियों पर

ई राज
अहमद साहब महीने भर से चैन से सो नहीं पाए थे। उनकी आंखों के सामने हर रात काबा का पाकीजा मंजर घूमता रहता। साठ साल की उम्र में अपनी जीवन भर की जमापूंजी से उन्होंने हज यात्रा के लिए आवेदन किया था।
एक दिन अचानक उनके फोन पर एक कॉल आया। दूसरी तरफ से एक बेहद अदबदार आवाज गूंजी, ‘अस्सलाम वालेकुम, अहमद साहब? मैं हज कमेटी के सेंट्रल ऑफिस से बोल रहा हूं। मुबारक हो, वीआईपी कोटे में आपका और आपकी बेगम का चयन हो गया है!’ अहमद साहब की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। लेकिन अगली ही सांस में जालसाज ने अपना पैंतरा बदला, ‘साहब, आपका बायोमीट्रिक और स्पेशल मेडिकल स्लॉट बुक करने का समय खत्म हो रहा है। अगर अगले दस मिनट में प्रोसेस पूरा नहीं हुआ, तो आपकी सीट वेटिंग लिस्ट वाले को दे दी जाएगी।’ अहमद साहब घबरा गए। इसी घबराहट का फायदा उठाकर ठग ने उनके व्हॉट्सऐप पर एक फर्जी लिंक भेजा, जो दिखने में हू-ब-हू आधिकारिक हज पोर्टल जैसा था
लूट का पूरा ताना-बाना
वीआईपी कोटा और स्लॉट बुकिंग का झांसा: ‘अंतिम मौका’ और ‘सीट रद्द होने’ का डर दिखाकर पीड़ितों को सोचने का समय ही नहीं दिया जाता।
फर्जी ऐप और एपीके फाइलें: ‘हज गाइड’ या ‘डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन’ के नाम पर व्हॉट्सऐप पर एक एपीके फाइल भेजी जाती है, जिसे डाउनलोड करते ही शिकार का फोन हैक हो जाता है।
फर्जी पोर्टल और यूपीआई क्यूआर कोड: वेरिफिकेशन फीस के नाम पर ५,००० से १०,००० रुपए का क्यूआर कोड भेजा जाता है।
ओटीपी और बायोमीट्रिक चोरी: जैसे ही यूजर फॉर्म में अपना आधार, बैंक अकाउंट और फोन पर आया ओटीपी डालता है, खाते से पूरी जमापूंजी साफ हो जाती है।
अहमद साहब घबराहट में जैसे ही उस लिंक पर क्लिक कर ओटीपी बताने वाले थे, उनके बेटे फैजान ने तुरंत फोन झपट लिया और कॉल काट दी। फैजान ने उन्हें अखबार की हेडलाइन दिखाई, ‘साइबर जालसाजों के निशाने पर हज यात्री’। फैजान ने समझाया, ‘अब्बू, हज कमेटी कभी भी फोन पर पैसे या ओटीपी नहीं मांगती। यह साइबर फ्रॉड स्टार का नया पैंतरा है, जो लोगों की आस्था और जल्दबाजी का फायदा उठाकर उनकी जिंदगी भर की कमाई लूट रहे हैं।’ अहमद साहब के रोंगटे खड़े हो गए। एक पल की जल्दबाजी में उनका सपना और खून-पसीने की कमाई दोनों डूबने से बच गए थे।

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