अरुण कुमार गुप्ता
बांग्लादेश की जेल में बंद संत चिन्मय कृष्ण दास प्रभु की अपनी मां के पार्थिव शरीर के पास शोक मनाते हुए तस्वीरें सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। टीएमसी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में सत्ता हासिल करने की कोशिश में जुटी भाजपा अब चिन्मय दास के मुद्दे को भूल गई है। टीएमसी प्रवक्ता और विधायक कुणाल घोष ने कहा कि चिन्मय दास का मामला दूसरे देश से जुड़ा है, इसलिए वे इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन अपनी मां के निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर के पास संत को विलाप करते देखना बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने सवाल किया कि केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार और पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में राजनीति करने वाली भाजपा इस मामले में आखिर क्या कर रही है? घोष ने भाजपा के पुराने रुख की याद दिलाते हुए कहा कि जब पार्टी राज्य में विपक्ष में थी, तब उसने चिन्मय दास की गिरफ्तारी और उनकी रिहाई की मांग को लेकर कोलकाता स्थित बांग्लादेश के उप उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन किए थे। उन्होंने सवाल किया कि अब सत्ता की चाह में क्या भाजपा ने चिन्मय दास को भुला दिया है? क्या उसे संत के गेरुए वस्त्र भी याद नहीं रहे? बताया गया कि चिन्मय दास को अपनी मां संध्या रानी धर के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पांच घंटे की पैरोल दी गई थी। चट्टोग्राम के हथाज़ारी स्थित पुंडरीक धाम में वे मां के पार्थिव शरीर के पास गहरे शोक में दिखाई दिए।
३० बच्चों की मौत, फिर भी सरकार बेखबर!
मध्य प्रदेश के बालाघाट में ३० से ज्यादा बच्चों की मौत के आरोपों ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। अस्पतालों में क्षमता से कई गुना ज्यादा बच्चों का इलाज, गांवों में दूषित पानी और कुपोषण की शिकायतों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के संयोजक अभिजीत दीपके ने आदिवासी इलाकों का दौरा कर सरकार और प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए। दीपके ने अडोरी, कोरका और बोंडारी गांवों में पहुंचकर मृत बच्चों के परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने प्रभावित इलाकों की स्वास्थ्य और पेयजल व्यवस्था का जायजा लिया। जनहित याचिका में दावा किया गया है कि महज ५० बिस्तरों वाले अस्पताल में करीब ४०० बच्चों का इलाज किया जा रहा था। यानी जिन बच्चों को बेहतर इलाज और सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए था, उन्हें बदहाल व्यवस्था के भरोसे छोड़ दिया गया। सबसे गंभीर आरोप पेयजल को लेकर हैं। याचिका में कहा गया है कि कई इलाकों में हैंडपंप से पीले रंग का पानी निकल रहा है। वहीं बच्चों और महिलाओं को कई महीनों से समय पर पौष्टिक भोजन नहीं मिलने का भी आरोप है। दीपके ने कहा कि बच्चों की मौत के बाद भी प्रशासन ने जिम्मेदारी तय नहीं की। उन्होंने सवाल किया कि आखिर इतनी मौतों के बाद भी किसी अधिकारी पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? उन्होंने कहा कि हम सिर्फ जिम्मेदारी और जवाबदेही तय करने आए हैं। मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर पीठ ने राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, बालाघाट कलेक्टर समेत संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
