-दो प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति लाइसेंस निलंबन के बजाय समझौता शुल्क से निपटा मामला
सुरेश गोलानी / मुंबई
महाराष्ट्र राज्य उत्पादन शुल्क विभाग (ठाणे) ने मीरा रोड (पूर्व) क्षेत्र में नियमों का उल्लंघन करने वाले दो रेस्टोरेंट और बार के खिलाफ कार्रवाई की है। हालांकि, दोनों ही मामलों में उल्लंघनकर्ताओं के प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित या रद्द करने के बजाय उन पर दंड के रूप में मामूली समझौता शुल्क लगाए जाने से इस कागजी कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।
पहला मामला मीरा रोड के शीतल नगर इलाके में स्थित होटल ऐश्वर्या रेस्टोरेंट एंड बार का है। यहां ‘सी’ वार्ड के उप निरीक्षक द्वारा किए गए औचक निरीक्षण के दौरान बार के परवाना कक्ष (लाइसेंस क्षेत्र) में बिना ट्रांसपोर्ट पास का अवैध शराब स्टॉक मिला। इसमें ट्यूबर्ग स्ट्रांग बीयर की १० बोतलें शामिल थीं। इसके अलावा, तय समय सीमा के बाद भी तीन महिलाएं बार रूम में काम करती पाई गर्इं। बार के स्वीकृत नक्शे में भी अनधिकृत बदलाव पाया गया।
दूसरे मामले में शांति पार्क स्थित होटल मेजवानी रेस्टोरेंट एंड बार की जांच के दौरान बार का स्टॉक रजिस्टर अपडेट नहीं पाया गया। साथ ही, लाइसेंस प्राप्त क्षेत्र की सीमा से बाहर यानी सार्वजनिक या अनधिकृत जगह पर ग्राहकों को शराब परोसने जैसे नियमों की अनदेखी भी सामने आई।
लाइसेंस निलंबित या रद्द करने के बजाय आबकारी विभाग ने होटल ऐश्वर्या और होटल मेजवानी पर क्रमश: ४० हजार और ३० हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। दोनों बार मालिकों को १० दिनों के भीतर जुर्माने की राशि सरकारी खजाने में ऑनलाइन ई-चालान के माध्यम से जमा करने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, निर्धारित समय में जुर्माना नहीं भरने पर राशि पर २ प्रतिशत प्रतिमाह की दर से ब्याज वसूला जाएगा और प्रतिष्ठान को तत्काल बंद कर दिया जाएगा।
ज्ञात हो कि महाराष्ट्र दारूबंदी कायदा, १९४९ (अब महाराष्ट्र मद्यनिषेध अधिनियम) के तहत जब कोई बार या रेस्टोरेंट नियमों का उल्लंघन करता है, तो प्रशासन के पास लाइसेंस रद्द करने, निलंबित करने या जुर्माना लगाने के विकल्प होते हैं।
लेकिन अधिकतर मामलों में धारा ५४ (१) (सी) के तहत परमिट निलंबन जैसे सख्त कदम उठाने के बजाय आबकारी विभाग जुर्माना लगाने का विकल्प चुनता है। इसे लेकर स्थानीय हलकों में चर्चा है कि नियमों की धज्जियां उडाने वाले इन बड़े प्रतिष्ठानों पर यह कार्रवाई काफी हल्की-फुल्की है, जिससे कानून का डर कम हो सकता है।
हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह जुर्माना लाइसेंस रद्द करने के विकल्प के तौर पर आखिरी चेतावनी के रूप में वसूला जा रहा है और दोबारा चूक होने पर सीधे तालाबंदी की कार्रवाई की जाएगी।
बारों की चटाई में खटाई
आबकारी विभाग का यह दायित्व है कि बारों द्वारा लाइसेंस प्राप्त आपूर्तिकर्ताओं से की गई खरीदारी का विस्तृत रिकॉर्ड यानी चटाई, आपूर्ति श्रृंखला और बिक्री की मात्रा का हर महीने निरीक्षण करे, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उत्पाद शुल्क वसूली का लेखा-जोखा सुव्यवस्थित है या उसमें हेराफेरी की जा रही है।
लेकिन मीरा-भायंदर शहर के ज्यादातर बार मालिक इस कानून की खुलेआम धज्जियां उडाते हुए उचित वाणिज्यिक उत्पाद शुल्क के भुगतान से बचने के लिए आधिकारिक थोक नेटवर्क को दरकिनार कर खुदरा दुकानों से शराब की खरीदारी कर रहे हैं। आरोप है कि ऐसी खरीदारी का उचित हिसाब किताब नहीं होता है।
आरोप यह भी है कि मीरा-भायंदर शहर में चटाई यानी खरीद-बिक्री रजिस्टर में हेराफेरी करके टैक्स चोरी जैसे गंभीर अपराध को बड़ी चालाकी से अंजाम दिया जा रहा है। इससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने के साथ ही अनियंत्रित खरीद-बिक्री के कारण बाजार में नकली शराब के प्रचलन का खतरा भी बढ़ सकता है, जो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
