मुख्यपृष्ठनए समाचारजीएसटी दफ्तर में ‘काली कमाई’ का खेल!

जीएसटी दफ्तर में ‘काली कमाई’ का खेल!

-४० लाख की कथित रिश्वत लेते बिचौलिया गिरफ्तार;
-तलाशी में ४३ लाख नकद, ९० लाख के जेवर मिलने का दावा

सामना संवाददाता / मुंबई

करदाताओं से टैक्स वसूलने वाले जीएसटी विभाग के अधिकारियों पर ही कथित रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगने से हड़कंप मच गया है। जीएसटी और रॉयल्टी विवाद निपटाने के नाम पर रु.१.५० करोड़ की कथित रिश्वत मांगने और बाद में रु.४० लाख में सौदा तय होने के मामले में सीबीआई ने जीएसटी के अतिरिक्त आयुक्त एवं आईआरएस अधिकारी विनय कुमार कांठेती, जीएसटी अधीक्षक राकेश कुमार सिन्हा और उनके निजी व्यक्ति नरिंदर राजपूत को गिरफ्तार किया है।
सीबीआई के मुताबिक, मामला एक स्टोन-क्वॉरी कंपनी से जुड़े जीएसटी और रॉयल्टी विवाद का है। आरोप है कि कंपनी का मामला निपटाने के एवज में पहले रु.१.५० करोड़ मांगे गए। बातचीत के बाद कथित रकम रु.४० लाख तय हुई। आरोप है कि अधिकारियों ने सीधे रिश्वत लेने के बजाय एक निजी व्यक्ति के जरिए रकम पहुंचाने की व्यवस्था की। सीबीआई ने जाल बिछाकर रु.४० लाख लेते हुए उनके निजी व्यक्ति को रंगे हाथ दबोच लिया। इसके बाद दोनों जीएसटी अधिकारियों की कथित भूमिका जांच के घेरे में आ गई।
हालांकि, गिरफ्तारी के बाद अदालत में सीबीआई को झटका लगा। ठाणे की विशेष अदालत ने हिरासत की मांग खारिज कर तीनों आरोपियों को निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि कथित रिश्वत की रकम जब्त हो चुकी है और आरोपियों के मोबाइल भी बरामद किए जा चुके हैं। सीबीआई ने आरोपियों की भूमिका के पुख्ता सबूत होने का दावा करते हुए आदेश को चुनौती देने की बात कही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह कथित ‘रिश्वत वसूली’ सिर्फ तीन आरोपियों तक सीमित थी या इसके पीछे सरकारी तंत्र में फैला कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय था। जांच के नतीजे से ही तस्वीर साफ होगी।
रिश्वत पकड़ी गई, फिर ‘काली कमाई’ की तलाशी!
सीबीआई ने आरोपियों के परिसरों पर छापेमारी की तो करीब रु.४३ लाख नकद और लगभग रु.९० लाख के आभूषण बरामद होने की जानकारी सामने आई। एजेंसी सूत्रों के अनुसार, बड़ी बरामदगी जीएसटी अधीक्षक राकेश कुमार सिन्हा के परिसर से हुई। सीबीआई अब इस पूरे मामले में किसी बड़े भ्रष्टाचार नेटवर्क की संभावित कड़ी खंगाल रही है।

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