मुख्यपृष्ठनए समाचारगणपति बाद महाराष्ट्र के सीएम का ‘विसर्जन’?

गणपति बाद महाराष्ट्र के सीएम का ‘विसर्जन’?

-फडणवीस की दिल्ली दौड़, शाह की मुंबई दस्तक और महायुति में बढ़ती बेचैनी से सत्ता परिवर्तन की अटकलें तेज

सामना संवाददाता / मुंबई

गणेशोत्सव की धूम के बीच महाराष्ट्र की राजनीति में एक अलग तरह की हलचल दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की दिल्ली आवाजाही, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मुंबई में गतिविधियां और महायुति के घटक दलों के बीच लगातार सामने आ रहे मतभेदों ने राजनीतिक गलियारों में सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या गणपति विसर्जन के बाद महाराष्ट्र की सत्ता में भी कोई बड़ा फेरबदल होने वाला है।
हाल के दिनों में भाजपा और एकनाथ शिंदे के रिश्तों में तनाव के संकेत सामने आए हैं। शिंदे के एक मंत्रिमंडल की बैठक से गैरहाजिर रहने के बाद महायुति में सब कुछ ठीक न होने की चर्चा तेज हुई। विवाद सहकारी संस्थाओं पर नियंत्रण और सरकारी महामंडलों में पदों के बंटवारे तक फैला हुआ बताया जा रहा है।
शिंदे की नाराजगी, मंत्रियों के स्टाफ पर सीएम की कैंची!
फडणवीस सरकार ने मंत्रियों के कार्यालयों में नियुक्त ५५० से अधिक कर्मचारियों को उनके मूल विभागों में वापस भेज दिया। नई व्यवस्था के तहत मुख्यमंत्री कार्यालय को मंत्रियों के फैसलों और नियुक्तियों की समीक्षा करने की अधिक शक्ति मिली है। इससे महायुति के तीनों दलों के कुछ मंत्रियों में असंतोष होने की खबरें हैं। उधर, अजीत पवार गुट भी वित्त और नियोजन विभाग वापस पाने के लिए दबाव बना रहा है और इस मुद्दे पर अमित शाह से बातचीत की तैयारी की गई है। इसके साथ ही मराठा आरक्षण आंदोलन ने सरकार पर अलग दबाव बना रखा है। मनोज जरांगे की मुंबई में आंदोलन की तैयारी और फडणवीस पर लगातार हमलों से राजनीतिक माहौल और संवेदनशील हो गया है। फिलहाल मुख्यमंत्री बदलने की कोई आधिकारिक घोषणा या पुष्ट संकेत नहीं है। लेकिन सत्ता के भीतर बढ़ती खींचतान ने गणेशोत्सव के बाद संभावित राजनीतिक पुनर्संतुलन की चर्चा जरूर तेज कर दी है। सवाल यही है कि गणपति विसर्जन के बाद क्या महायुति में भी किसी बड़े राजनीतिक ‘विसर्जन’ की पटकथा लिखी जाएगी?

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