-सत्ताधारी विधायक ने ही खोली सरकार की पोल
-कंपनियों पर दबाव और वसूली के लगाए गंभीर आरोप
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में महायुति सरकार उद्योग, निवेश और रोजगार के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन सरकार के भीतर से ही सामने आ रहे गंभीर आरोप इन दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। महायुति के घटक दल शिंदे गुट के विधायक महेंद्र थोरवे ने ही सत्ता के सहयोगी नेताओं पर कंपनियों को कथित रूप से ब्लैकमेल कर वसूली करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। थोरवे के आरोपों ने सत्ता के गलियारों में खलबली मचा दी है और यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब सत्ताधारी दलों के नेता ही उद्योगों पर दबाव डालेंगे तो महाराष्ट्र में निवेश और रोजगार वैâसे बढ़ेगा?
रायगड में रोजगार के मुद्दे पर महायुति के भीतर शुरू हुआ विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। दादा गुट के नेता सुधाकर घारे के रोजगार आंदोलन को लेकर गठबंधन के दोनों घटकों में टकराव दिखाई दे रहा है। इसी विवाद के बीच विधायक महेंद्र थोरवे ने दादा गुट के सांसद सुनील तटकरे और उनके सहयोगियों पर निशाना साधते हुए कंपनियों पर दबाव बनाने का आरोप लगाया।
‘कंपनियों को परेशान किया जा रहा’
थोरवे का आरोप है कि क्षेत्र में काम कर रही कंपनियां स्थानीय लोगों को रोजगार देने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन राजनीतिक दबाव के जरिए उन्हें परेशान किया जा रहा है। उनके मुताबिक, कंपनियों पर दबाव बढ़ने से उद्योगों के लिए काम करना मुश्किल हो रहा है और इसका सीधा असर स्थानीय रोजगार पर पड़ रहा है। अगर सत्ता पक्ष के विधायक द्वारा लगाए गए ये आरोप सही हैं तो यह महाराष्ट्र में निवेश का माहौल बनाने के सरकार के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उद्योगों को सुविधाएं और सुरक्षित वातावरण देने के बजाय उन पर राजनीतिक दबाव का आरोप लगना राज्य की औद्योगिक छवि के लिए भी चिंता का विषय है।
महायुति के ‘विकास मॉडल’ पर सवाल
रायगड़ से उठे इस विवाद ने महायुति के विकास मॉडल की असली तस्वीर पर बहस छेड़ दी है। सरकार अगर वास्तव में महाराष्ट्र को उद्योग और रोजगार का केंद्र बनाना चाहती है तो उद्योगों को राजनीतिक दबाव और कथित वसूली से मुक्त माहौल देना होगा।
