-राजनीतिक रिश्तों के आरोपों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?
-ईडी की दखल के बाद भी करोड़ों की जमीनों का मामला बरकरार
सुनील ओसवाल / मुंबई
नासिक के कथित भोंदूबाबा अशोक खरात से जुड़े मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। खरात के कथित राजनीतिक संबंधों को लेकर पहले से आरोप लगाए जाते रहे हैं। गंभीर आपराधिक मामलों के बावजूद अब तक किसी राजनीतिक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई सामने नहीं आने से जांच एजेंसियों की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन राजनीतिक संबंधों और कथित आर्थिक अनियमितताओं के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
खरात के खिलाफ यौन शोषण समेत करीब १४ स्थानों पर मामले दर्ज होने का दावा किया जा रहा है। इसके अलावा, उनकी पत्नी के नाम पर सैकड़ों करोड़ रुपए की जमीन खरीदने और इन सौदों में कथित बेनामी धन के इस्तेमाल के आरोप भी लगाए गए हैं। इन दावों के बीच सबसे बड़ा सवाल जमीन सौदों और उनकी संभावित आर्थिक पृष्ठभूमि की जांच को लेकर है। सिंहस्थ कुंभ मेले की पृष्ठभूमि में नासिक-त्र्यंबकेश्वर के बीच प्रस्तावित करीब ६६ किलोमीटर लंबे रिंग रोड के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। दावा है कि पाथर्डी और गवळणी क्षेत्र की कुछ जमीनें, जो खरात की पत्नी के नाम पर बताई जाती हैं, इस प्रक्रिया के दायरे में आ सकती हैं। आरोप है कि संबंधित जमीनें भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले खरीदी गर्इं और बाद में उनके बढ़े हुए मूल्यांकन के आधार पर अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ी। खरात परिवार से जुड़ी जमीनों का कुल मूल्य करीब ४०० करोड़ रुपए होने का दावा भी किया जा रहा है। इन दावों की वास्तविकता जांच का विषय है। खरात परिवार से जुड़े कथित आर्थिक व्यवहारों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई का भी उल्लेख सामने आया है। इसके बावजूद जमीनों और भूमि अधिग्रहण से जुड़े सवाल पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। ईडी की जांच किस स्तर पर है, किन संपत्तियों और लेन-देन की जांच की जा रही है और आगे क्या कार्रवाई प्रस्तावित है। इन सवालों पर स्पष्टता का इंतजार है।
