-कृत्रिम तालाब के नाम पर मीरा-भायंदर मनपा का ‘कंक्रीट’ फॉर्मूला
-प्राकृतिक तालाब में आरसीसी की दीवार खड़ी कर बनाया ‘कृत्रिम’ विसर्जन क्षेत्र, नियमों की उड़ार्इं धज्जियां!
सुरेश गोलानी / मुंबई
मीरा-भायंदर महानगरपालिका का एक और अजीबोगरीब और विवादास्पद कारनामा सामने आया है। गणेशोत्सव में मूर्ति विसर्जन के लिए कृत्रिम तालाब बनाने के बजाय मनपा ने प्राकृतिक तालाब के भीतर ही आरसीसी की पक्की दीवार खड़ी कर उसे दो हिस्सों में बांट दिया है। अब मनपा का दावा है कि दीवार के एक तरफ का हिस्सा ‘कृत्रिम तालाब’ है, जहां प्लास्टर ऑफ पेरिस और रासायनिक रंगों वाली मूर्तियों का विसर्जन किया जा सकता है। यानी तालाब वही, पानी वही और बस बीच में कंक्रीट की दीवार खड़ी कर उसे कृत्रिम तालाब का नाम दे दिया गया!
पर्यावरण संरक्षण को लेकर मुंबई उच्च न्यायालय और राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि छह फीट से कम ऊंचाई वाली मूर्तियों का प्राकृतिक जलस्रोतों में विसर्जन नहीं किया जा सकता। इसके लिए मनपाओं को अलग से कृत्रिम तालाब या टैंक तैयार करने के निर्देश हैं। लेकिन मीरा-भायंदर मनपा ने इन नियमों का पालन करने के बजाय प्राकृतिक तालाब को ही ‘कृत्रिम’ घोषित करने का रास्ता निकाल लिया। इस फैसले को लेकर पर्यावरण प्रेमी और पत्रकार धीरज परब ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत भेजी है। शिकायत में मनपा आयुक्त राधा बिनोद शर्मा पर न्यायालय, राज्य सरकार और राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों की अनदेखी का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने पिछले वर्ष प्राकृतिक तालाबों, खाड़ी और समुद्र में विसर्जित पीओपी मूर्तियों को बाहर निकालकर वैज्ञानिक तरीके से निपटाने के आदेश का पालन नहीं होने का भी आरोप लगाया है।
मछलियां मरीं, फिर भी सबक नहीं!
गौरतलब है कि पिछले वर्ष भायंदर के मांडली तालाब में बड़े पैमाने पर मछलियों की मौत हुई थी। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में जल प्रदूषण को इसकी वजह बताया गया था। इसके बाद मनपा ने लिखित आश्वासन दिया था कि भविष्य में तालाब में पीओपी मूर्तियों का विसर्जन नहीं कराया जाएगा। इसके बावजूद इस वर्ष प्राकृतिक जलस्रोत को ही कंक्रीट से बांटकर विसर्जन की अनुमति देने की तैयारी ने मनपा की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि पर्यावरण बचाना है या नियमों को कंक्रीट की दीवार के पीछे छिपाना है?
