महाराष्ट्र पर एक के बाद एक संकटों के विघ्न टूट रहे हैं, ऐसे समय में आज विघ्नहर्ता श्री गणराय का आगमन हो रहा है। पारंपरिक उत्साह और उल्लास के माहौल में आज घर-घर में लाडले गणराया की स्थापना होगी। सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों के गणपति भी अपने-अपने मंडपों में शान से विराजमान होंगे। इस साल का गणेशोत्सव पूरे १२ दिनों का है। ऐसे में अगले दो हफ्ते तक महाराष्ट्र एक अलग ही चैतन्यमय, भक्तिमय और अपार उत्साह के वातावरण से सराबोर रहेगा। गणेशोत्सव का समय यानी श्रद्धा, भक्ति और परंपरा का अनोखा संगम। इसी संगम में मराठी माणुस अनंत चतुर्दशी तक आनंद में डूबा रहेगा। सत्ताधारियों ने भले ही कितनी ही मुसीबतें, कितने ही विघ्न खड़े किए हों, फिर भी लाडले गणराया की आवभगत में मराठी माणुस कोई कमी नहीं आने देगा। सरकार ने ऐन गणेशोत्सव के मुहाने पर शक्कर की महंगाई का डंडा चला दिया। दूध महंगा कर दिया। सीएनजी, घरेलू गैस, पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिए। इसका असर मिठाई से लेकर मीठे खाद्य पदार्थों तक सभी की कीमतों पर पड़ा है। फिर भी गणराया को उनके प्रिय मोदक और लड्डू का प्रसाद कम न पड़े, इसका पूरा ध्यान गणेश भक्त रखेंगे। आम जनता एक श्रद्धा से यह सब कर रही है, लेकिन इसी
श्रद्धा और भक्ति का आडंबर
रचने का काम इस समय सत्तापक्ष द्वारा किया जा रहा है। इस आडंबर को ही हिंदुत्व और हिंदू धर्म बताकर थोपने की कोशिशें चल रही हैं। पुणे के गणेशोत्सव में ‘डीजे’ के शोर का विरोध करने वाले युवक विद्यानंद बापट के साथ मारपीट इसी मंशा से की गई। इस विवाद को सुलझाने के बजाय सत्ताधारी लोग विद्यानंद बापट को ‘दिमागी नक्सल’, ‘बाहरी’ बता रहे हैं। मुख्यमंत्री तो लोकसंवाद से रास्ता निकालो कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। देश में दरवृद्धि और महंगाई में आग लगी हुई है। अमेरिका-ईरान के बीच फिर भड़के युद्ध का तेल महंगाई में डाला जा रहा है। ‘अल-नीनो’ की मार से राज्य पर मंडरा रहा सूखे का संकट और गहरा हो गया है। खरीफ की फसलें कई जगहों पर झुलसने लगी हैं। बारिश ही कम हुई है इसलिए इस साल के रबी सीजन पर भी अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। पेपर लीक का विघ्न महाराष्ट्र का पीछा छोड़ने को तैयार नहीं है। नीट, टीईटी के बाद अब महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के भी पेपर लीक हो गए। वो परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं। अब बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने
एसआईटी गठित कर
पूरी परीक्षा प्रणाली को सुधारने का निर्णय वगैरह किया है। इंटरव्यू रद्द कर दिए हैं, लेकिन हजारों छात्रों के राख हो गए सपनों का क्या? बच्चों पर अत्याचार बढ़ गए हैं। सड़कों के गड्ढे रोज मासूमों की बलि ले रहे हैं। किसानों की आत्महत्याएं जारी हैं। परप्रातीय रिक्शा-टैक्सी चालकों पर मराठी अनिवार्य करने के नियमों की धज्जियां खुद सत्ताधारी ही उड़ा रहे हैं। महाराष्ट्र आज जितना संकट में है, उतना पहले कभी नहीं था। दरवृद्धि, महंगाई, भ्रष्टाचार, अत्याचार, सूखा, पेपर लीक, ‘डीजे’ का हंगामा, यहां तक कि प्रत्यक्ष श्रीगणराया के आगमन पर ही दुर्घटनाओं के विघ्न जैसे संकटों की कतार बढ़ती ही जा रही है। तिलक ने जिस उद्देश्य से सार्वजनिक गणेशोत्सव शुरू किया था, वह उद्देश्य ही खोता जा रहा है। सार्वजनिक गणेशोत्सव पर भी ‘कॉर्पोरेट’ कब्जा होने लगा है। कभी देश को वैचारिक दिशा देने वाला महाराष्ट्र सत्तांध और धर्मांध शासकों की वजह से दिशाहीन हो गया है। शासकों ने प्रगतिशील महाराष्ट्र को धार्मिक उन्माद के अंधेरे में धकेल दिया है। मौजूदा शासक ही इस समय देश और महाराष्ट्र पर सबसे बड़े विघ्न हैं। क्या अब तो जनता इसे पहचानेगी? हे गणराया, क्या तू जनता को ऐसी बुद्धि देगा? विघ्नहर्ता, अब तू ही संभाल रे बाबा!
