-काशीमीरा में सिर पर गिरा सीमेंट स्लैब; युवक गंभीर, एक घंटे सड़क पर पड़ा रहा
-३ हादसे, ३ मौतें और एक घायल, आखिर कितनी जानों के बाद जागेगा एमएमआरडीए?
सामना संवाददाता / मीरा रोड
मुंबई महानगर क्षेत्र में मेट्रो निर्माण अब विकास से ज्यादा जानलेवा लापरवाही का प्रतीक बनता जा रहा है। रविवार को काशीमीरा में निर्माणाधीन मेट्रो-९ के एलिवेटेड हिस्से से सीमेंट का भारी टुकड़ा २३ वर्षीय शादाब के सिर पर गिर गया। गंभीर रूप से घायल युवक करीब एक घंटे तक सड़क किनारे पड़ा रहा। बाद में स्थानीय लोगों ने उसे ऑटोरिक्शा से अस्पताल पहुंचाया। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि निर्माण स्थल के नीचे न बैरिकेडिंग थी, न सुरक्षाकर्मी और न राहगीरों को रोकने की व्यवस्था। शादाब काशीमीरा में गद्दे की दुकान चलाता है। उसके सिर में फ्रैक्चर हुआ है और वह बयान देने की स्थिति में नहीं है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की है।
यह दस दिनों में तीसरा मेट्रो हादसा है। वडाला के भक्तिपार्क स्टेशन पर लोहे का मचान गिरने से दो मजदूरों नाहिज और साकिम की मौत हुई। हादसे की जानकारी पांच दिन तक सार्वजनिक नहीं की गई। एमएमआरडीए ने ठेकेदार और सलाहकार पर छह करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया। इसके बाद विक्रोली में मेट्रो निर्माण स्थल का लोहे का बैरिकेड चलती बाइक पर गिरा और ५४ वर्षीय प्लंबर वसी हैदर की जान चली गई। वहां ठेकेदार पर दो करोड़ रुपये का दंड लगाया गया। अब काशीमीरा में जे. कुमार कंपनी के कार्यस्थल पर नया हादसा हुआ है। मेट्रो-९ निर्माण में पहले भी अनेक दुर्घटनाएं और मौतें दर्ज हो चुकी हैं।
हादसे से पहले सुरक्षा क्यों नहीं?
हर दुर्घटना के बाद जांच, एफआईआर और करोड़ों का जुर्माना घोषित होता है, लेकिन जमीन पर सुरक्षा नहीं बदलती। ऐसे में यह सवाल उठते हैं कि केवल ठेकेदार पर जुर्माना क्यों? निरीक्षण प्रमाणित करने वाले इंजीनियर, सुरक्षा सलाहकार और एमएमआरडीए अधिकारी कब जिम्मेदार होंगे? मुंबई को मेट्रो चाहिए, लेकिन नागरिकों और मजदूरों की लाशों पर खड़ी मेट्रो नहीं!
प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि निर्माण स्थल के नीचे न बैरिकेडिंग थी, न सुरक्षाकर्मी और न राहगीरों को रोकने की व्यवस्था। दस दिनों में यह तीसरा मेट्रो हादसा है।
