-शीतल अवस्थी
-पितृदोष से मुक्ति और परिवार में सुख-समृद्धि के लिए करें पीपल पूजन, जल-अर्पण और दीपदान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ ऋण से मुक्ति और पूर्वजों की आत्मिक तृप्ति के लिए पितृपक्ष में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व है। माना जाता है कि निर्धारित तिथि पर पितरों का स्मरण और श्राद्ध न होने से परिवार में पितृदोष उत्पन्न हो सकता है। इससे रोग, मानसिक तनाव, आर्थिक परेशानी, पारिवारिक कलह और कार्यों में बाधा जैसी स्थितियां पैदा होने की मान्यता है।
जो लोग समय, धन या अन्य कारणों से विस्तृत श्राद्धकर्म नहीं कर पाते, उनके लिए धर्मग्रंथों में पीपल अथवा वट वृक्ष की पूजा को सरल उपाय बताया गया है। पीपल को भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है और पितरों का संबंध भी विष्णु स्वरूप से जोड़ा गया है। इसलिए पितृपक्ष में पीपल की पूजा पूर्वजों को प्रसन्न करने वाली मानी जाती है।
पीपल पूजा की विधि
प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पीपल के वृक्ष के नीचे की जगह साफ करें। वृक्ष की जड़ में जल अथवा दूध मिला जल अर्पित करें। इसके बाद चंदन, अक्षत, काले तिल और पुष्प चढ़ाएं।
पीपल के नीचे गाय के घी का दीपक जलाएं और दूध से बनी खीर का भोग लगाएं। स्वच्छ स्थान पर कुश का आसन बिछाकर पूर्वजों का स्मरण करें। इसके बाद चंदन की माला से एक, तीन अथवा पांच माला इस मंत्र का जाप करें-
ॐ ऐं पितृदोष शमनं ह्रीं ॐ स्वधा।
मंत्र-जप के बाद भगवान विष्णु की आरती करें और पितरों से परिवार की सुख-शांति तथा समृद्धि के लिए आशीर्वाद मांगें। पूजा में अर्पित जल थोड़ा-सा घर लाकर मुख्य द्वार और पूजा-स्थान के आसपास छिड़का जा सकता है। खीर का प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटें।
इन बातों का रखें ध्यान
पीपल की पूजा दिन के समय करें। परंपरागत मान्यता के अनुसार रविवार को पीपल को छूने से बचा जाता है, हालांकि जल अर्पित करने को लेकर क्षेत्रीय परंपराएं अलग हो सकती हैं। वृक्ष के पास प्लास्टिक, तेल या ऐसी सामग्री न छोड़ें जिससे उसे नुकसान हो। दीपक सुरक्षित स्थान पर रखें और आग फैलने का खतरा न होने दें।
पूजा के साथ माता-पिता एवं बुजुर्गों की सेवा, जरूरतमंदों को भोजन, गाय को चारा तथा पक्षियों को अन्न-जल देना भी पितरों की प्रसन्नता का श्रेष्ठ माध्यम माना गया है।
ये उपाय धार्मिक आस्था और परंपरागत मान्यताओं पर आधारित हैं। घरेलू, आर्थिक या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के व्यावहारिक समाधान भी साथ-साथ अपनाना आवश्यक है।
