-९,२९८ मरीजों ने खोली मनपा की मानसूनी तैयारियों की पोल
द्रुप्ति झा / मुंबई
मुंबई में मूसलाधार बारिश और जगह-जगह हुए जलभराव ने एक बार फिर मनपा के मानसूनी दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। जलजमाव के साथ सिर उठाती मच्छरजनित बीमारियों के आगे महानगरपालिका प्रशासन पूरी तरह पंगु नजर आ रहा है। सबसे डरावना सच यह है कि मुंबई में तीन सालों से चला आ रहा जीरो डेथ का रिकॉर्ड टूट चुका है और मलेरिया ने दो मासूम जिंदगियां निगल ली हैं। सवाल यह उठता है कि क्या मनपा का स्वास्थ्य और कीट नियंत्रण विभाग सिर्फ कागजों पर दवाइयां छिड़क रहा है?
तीन साल में मामले
दोगुने से ज्यादा
आंकड़े मनपा की घोर लापरवाही की गवाही दे रहे हैं। वर्ष २०२२ में जहां मलेरिया के ३,९८५ मामले दर्ज हुए थे, वहीं २०२५ में यह आंकड़ा छलांग लगाकर १०,१६३ पर पहुंच गया। इस साल (२०२६) के हालात और भी भयावह हैं। अकेले सितंबर तक ही ९,२९८ मरीज सामने आ चुके हैं, जो बीते पूरे साल के कुल मामलों का ९१.५ प्रतिशत है। यदि यही रफ्तार रही, तो आने वाले महीनों में स्थिति भयावह मोड़ ले सकती है।
बिल्डरों पर मेहरबानी,
जनता पर महामारी का संकट
शहरभर में चल रहे निर्माण कार्य और घटिया जलनिकासी प्रणाली इस महामारी का सबसे बड़ा जरिया बन चुकी है। निर्माण स्थलों पर महीनों से जमा गंदा पानी मच्छरों का सुरक्षित अड्डा बना हुआ है, लेकिन मनपा के अधिकारी बिल्डरों पर शिकंजा कसने के बजाय हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। नागरिक प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कीटनाशक छिड़काव की टीमें केवल खानापूर्ति कर रही हैं। केवल मलेरिया ही नहीं, डेंगू और लेप्टोस्पायरोसिस जैसी जानलेवा मानसूनी बीमारियां भी पूरी मुंबई को अपनी चपेट में ले चुकी हैं। लेप्टो की निगरानी और समय पर टेस्ट रिपोर्ट देने में मनपा की सुस्ती पहले ही सवालों के घेरे में है।
