अरुण कुमार गुप्ता
समस्तीपुर के मोहनपुर प्रखंड के हरदासपुर से सामने आया राहत वितरण का वीडियो बाढ़ की मार झेल रहे लोगों की बेबसी की तस्वीर दिखा रहा है। वीडियो में नाव से राहत के पैकेट पानी में फेंके जाते दिखाई दे रहे हैं और उन्हें पाने के लिए बड़ी संख्या में लोग बाढ़ के पानी में उतरते नजर आ रहे हैं। पैकेटों के लिए मची अफरातफरी ऐसी थी कि लोगों को अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना पानी में आगे बढ़ना पड़ा। वीडियो में नाव पर भीड़ और पानी में उतरकर पैकेट पकड़ने की कोशिश करते लोग दिखाई दे रहे हैं। ऐसे हालात में तेज धारा के बीच किसी के फिसलने या गहरे पानी में जाने का खतरा बना रहता है। यही वजह है कि राहत बांटने के तरीके ने सुरक्षा और व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े किए हैं। हरदासपुर गंगा के दियारा इलाके में स्थित है और बाढ़ के दौरान यहां आवागमन और रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित होती हैं। ऐसे में राहत सामग्री लोगों के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाने का तरीका भी सुरक्षित होना जरूरी है। अब जिला प्रशासन ने वीडियो के आधार पर जांच शुरू करने की बात कही है।
बाढ़ में डूबी सरकार की व्यवस्था!
बिहार में बाढ़ का पानी सिर्फ गांवों और घरों में नहीं घुसा है, बल्कि अब सरकार की राहत व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है। पश्चिम चंपारण के लौरिया से भाजपा विधायक विनय बिहारी ने बाढ़ पीड़ितों को पर्याप्त राहत नहीं मिलने का मुद्दा उठाते हुए अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विधायक मंगलवार को बेतिया कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठ गए और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आने तक धरना जारी रखने की बात कही। विनय बिहारी का कहना है कि लौरिया और योगापट्टी क्षेत्र में बाढ़ से लोग बेहाल हैं और राहत-बचाव कार्यों को लेकर वे संतुष्ट नहीं हैं। उनका दावा है कि उन्होंने प्रभावित लोगों की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री और आपदा प्रबंधन मंत्री से मुलाकात की थी, लेकिन जमीनी स्तर पर राहत को लेकर स्थिति संतोषजनक नहीं दिख रही है। विधायक कलेक्ट्रेट पहुंचे। जिलाधिकारी से मुलाकात नहीं होने के बाद वे परिसर में ही धरने पर बैठ गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक मुख्यमंत्री क्षेत्र की स्थिति देखने नहीं आते, वे धरना जारी रखेंगे। बाद में चनपटिया के विधायक अभिषेक रंजन भी उनके समर्थन में पहुंचे। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सवाल विपक्ष नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ भाजपा के विधायक की ओर से उठाया गया है।
विधायक का भाई है तो किस बात का डर?
मुजफ्फरपुर में जमीन विवाद से जुड़े सात मामलों ने अब एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्या रसूख के आगे कार्रवाई की धार कुंद पड़ जाती है? मामला बेलसंड विधायक अमित कुमार रानू के भाई सोनू सिंह उर्फ अभिनव से जुड़ा है। उनके खिलाफ सात मामलों में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल है और अब अदालत ने पुलिस से केस डायरी व उपलब्ध साक्ष्य पेश करने को कहा है। अगली सुनवाई ५ अक्टूबर को होगी। अहियापुर के झपहां इलाके में करीब डेढ़ एकड़ जमीन को लेकर विवाद है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, करीब २५ लोगों के निर्माणाधीन मकान और बाउंड्री वॉल जेसीबी से गिराए गए। जमीन पर कब्जे को लेकर प्रशासन की ओर से कोई आदेश जारी नहीं होने की बात भी रिपोर्ट में सामने आई है। इस मामले में २३ लोगों ने आवेदन दिए, जिसके आधार पर अलग-अलग केस दर्ज हुए। सात मामलों में सोनू सिंह ने अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। कोर्ट ने पुलिस को सातों मामलों में जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर केस डायरी दाखिल करने का निर्देश दिया है। यानी अब सिर्फ आरोप नहीं, पुलिस के पास मौजूद सबूतों की तस्वीर अदालत के सामने रखी जाएगी। उसी के बाद अग्रिम जमानत पर आगे की सुनवाई होगी। इसी मामले में विधायक के दूसरे भाई रवि कुमार सिंह की ओर से भी सात अग्रिम जमानत अर्जियां दाखिल की गई हैं, जिन पर ३ अक्टूबर को सुनवाई होनी है। दूसरी ओर, इसी विवाद से जुड़े दो आरोपियों की जमानत अर्जियां पहले ही खारिज हो चुकी हैं।़
