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महाराष्ट्र पर ‘पानीबंदी’ का साया!

-शहरों में १० प्रतिशत कटौती, जल-संकट वाले इलाकों में नए निर्माण रोकने पर विचार

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र के २६५ तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने के बाद अब पानी संकट की आंच शहरों तक पहुंचने लगी है। राज्य सरकार शहरी क्षेत्रों में जलापूर्ति में १० प्रतिशत कटौती तथा गंभीर संकट वाले इलाकों में नए निर्माण पर अस्थायी रोक लगाने जैसे कठोर उपायों पर विचार कर रही है। हालांकि, इन प्रस्तावों पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। सरकार का तर्क है कि उपलब्ध पानी को अगले मानसून तक बचाना जरूरी है। कम बारिश, गिरते भूजल स्तर और जलाशयों में घटते भंडार ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की चिंता बढ़ा दी है। हर जिले को ‘जल बजट’ बनाकर पेयजल, खेती, उद्योग और निर्माण के लिए उपलब्ध पानी का हिसाब रखने को कहा गया है। मुंबई में १० प्रतिशत पानी कटौती मई से ही लागू है। मनपा के अनुसार शहर को पानी देने वाली सात झीलों का मौजूदा भंडार १७ मई २०२७ तक ही चल सकेगा। तापमान बढ़ने पर वाष्पीकरण तेज होने से संकट और गंभीर हो सकता है। अब पुराने कुओं और भूजल स्रोतों को पुनर्जीवित करने की तैयारी की जा रही है। इस बीच सूखा सूची से बाहर रखे गए क्षेत्रों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के विधायकों में नाराजगी है। अतिरिक्त तालुकों को राहत के दायरे में लाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
-तालाब ९६ प्रतिशत भरे, फिर भी मुंबई पर पानी संकट!
-सात झीलों में ९६.६४ प्रतिशत भंडार, लेकिन बीएमसी का हिसाब,
पानी सिर्फ १७ मई २०२७ तक; १० प्रतिशत कटौती फिलहाल नहीं हटेगी
मुंबई को पानी देने वाली सात झीलें लगभग लबालब दिख रही हैं, फिर भी महानगर पर अगले साल गर्मियों में जलसंकट का खतरा मंडरा रहा है। बीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त अभिजीत बांगर ने महानगरपालिका सदन में बताया कि मंगलवार को सातों झीलों में कुल जलभंडार ९६.६४ज्ञ् था, लेकिन यह मौजूदा खपत के हिसाब से केवल १७ मई २०२७ तक चलेगा। इसी कारण मई से लागू १०ज्ञ् पानी कटौती वापस लेने की मांग प्रशासन ने स्वीकार नहीं की। पिछले साल इसी तारीख को जलभंडार ९७.५७ प्रतिशत और २०२४ में ९९.०९ प्रतिशत था। इस साल झीलें १०० प्रतिशत क्षमता तक नहीं भर सकीं।
-प्यास बुझाने अब पुराने कुओं की बारी
-२०२७ के मानसून तक वैकल्पिक पानी जुटाने की तैयारी; बीएमसी पुराने कुओं-बोरवेल की सफाई कर जांचेगी खारापन
झीलों के पानी पर बढ़ते दबाव के बीच बीएमसी अब शहर के पुराने कुओं और बोरवेल को फिर जिंदा करने की तैयारी में है। महानगरपालिका के हाइड्रोलिक विभाग ने वार्ड स्तर पर पुराने भूजल स्रोतों की सफाई, गाद निकालने और पानी में खारेपन की जांच की प्रक्रिया शुरू की है। मकसद २०२७ के मानसून तक वैकल्पिक जल स्रोत तैयार करना है। मुंबई की सात झीलों में फिलहाल ९६.६४ प्रतिशत पानी है, लेकिन बीएमसी का अनुमान है कि मौजूदा भंडार केवल १७ मई २०२७ तक चलेगा। समुद्र से घिरे मुंबई में भूजल का खारापन लंबे समय से बड़ी बाधा रहा है, इसलिए पुनर्जीवित कुओं का पानी इस्तेमाल से पहले जांचा जाएगा। जांच का बड़ा सवाल यह है कि देश की सबसे अमीर महानगरपालिका वाले शहर को जल-सुरक्षा के लिए पुराने कुओं की ओर लौटना पड़ रहा है तो दीर्घकालीन वैकल्पिक जल स्रोतों की योजना कहां तक पहुंची?

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