-राशन दुकानों की घटती संख्या के बीच वितरण व्यवस्था पर उठे सवाल
फिरोज खान / मुंबई
मुंबई की राशन दुकानों में गरीब और जरूरतमंद नागरिकों को अनाज वितरण की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। नागरिकों ने राशन दुकानदारों के खिलाफ कई गंभीर शिकायतें की हैं। आरोप है कि कई जगह समय पर अनाज नहीं मिलता और अनाज मिलने के बाद भी रसीद नहीं दी जाती। इससे सार्वजनिक वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। कुछ राशनकार्ड धारकों का आरोप है कि शिकायत करने पर उनका राशनकार्ड निरस्त करने की धमकी दी जाती है।
नियमों के अनुसार, वितरित किए जाने वाले अनाज के सीलबंद नमूने सुरक्षित रखना अपेक्षित है, लेकिन नागरिकों का आरोप है कि कई राशन दुकानों में इसका पालन नहीं किया जा रहा है। इतना ही नहीं, शिकायत दर्ज कराने के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली शिकायत पुस्तिका भी कई दुकानों पर नहीं होने की शिकायत सामने आई है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि शिकायत करने वाले गरीब लाभार्थियों को राशनकार्ड बंद करने की धमकी दी जाती है। गरीब परिवारों के लिए राशन सरकारी सुविधा के साथ-साथ उनके घर के चूल्हे का महत्वपूर्ण सहारा है। ऐसे में शिकायत के अधिकार को लेकर लाभार्थियों में भय पैदा होना प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
हजारों दुकानों के अस्तित्व पर भी संकट
दूसरी ओर, मुंबई में पिछले पांच वर्षों के दौरान करीब एक हजार राशन दुकानें बंद होने की बात सामने आई है। घटता अनाज वितरण, बढ़ता खर्च, कम ग्राहक संख्या और अपर्याप्त कमीशन के कारण राशन दुकानदारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा होने का दावा किया जा रहा है। एक तरफ राशन दुकानों की संख्या घट रही है, वहीं दूसरी तरफ मौजूद दुकानों से वितरण को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में सार्वजनिक वितरण व्यवस्था की निगरानी कितनी प्रभावी है, इस पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सरकार की कथित चुप्पी से लाभार्थियों में नाराजगी बढ़ रही है।
