मुख्यपृष्ठस्तंभवैश्विक डीजल संकट की आंच भारत तक...पंपों पर औद्योगिक खरीदारों की कतार!

वैश्विक डीजल संकट की आंच भारत तक…पंपों पर औद्योगिक खरीदारों की कतार!

-सस्ता खुदरा डीजल खरीदने उमड़े थोक उपभोक्ता; जियो-बीपी और नायरा ने लगाई सीमा, सरकारी कंपनियां भी कर सकती हैं सख्ती

नई दिल्ली। खाड़ी देशों और रूस से डीजल आपूर्ति में व्यवधान के बीच वैश्विक बाजार में पैदा हुई किल्लत का असर अब भारत के खुदरा पेट्रोल पंपों पर दिखाई देने लगा है। अंतर्राष्ट्रीय कीमतें बढ़ने और थोक डीजल महंगा होने के कारण औद्योगिक तथा दूसरे बड़े उपभोक्ता सस्ता र्इंधन खरीदने के लिए सामान्य पंपों की ओर रुख कर रहे हैं। इससे आम वाहन चालकों के लिए उपलब्ध खुदरा आपूर्ति पर दबाव बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है।
हालात को देखते हुए निजी र्इंधन विक्रेता जियो-बीपी ने अपने पंपों पर प्रति ग्राहक प्रतिदिन डीजल खरीद की सीमा ५० लीटर तय की है। नायरा एनर्जी के विभिन्न पंपों पर यह सीमा ७० से २०० लीटर के बीच रखी गई है। सरकारी तेल कंपनियां इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम भी मांग बढ़ने पर ऐसी पाबंदियां लगा सकती हैं।
संकट की जड़ खुदरा और थोक कीमतों का बढ़ता अंतर है। भारत में पंप की दरें अंतर्राष्ट्रीय लागत के साथ तत्काल नहीं बढ़तीं, जबकि उद्योगों को सीधे मिलने वाले थोक र्इंधन की कीमत बाजार के ज्यादा करीब रहती है। इसी अंतर का लाभ उठाने के लिए बड़े खरीदार खुदरा नेटवर्क पर आ रहे हैं।
यदि यह प्रवृत्ति बढ़ी तो तीन स्तरों पर मार पड़ सकती है, पंपों पर डीजल की उपलब्धता घटेगी, मालवाहक वाहनों और बसों की परिचालन लागत बढ़ेगी तथा उद्योग महंगी ऊर्जा का बोझ वस्तुओं की कीमतों में जोड़ेंगे। फिलहाल देशव्यापी डीजल संकट अथवा सरकारी राशनिंग घोषित नहीं हुई है। लेकिन निजी कंपनियों द्वारा बिक्री सीमित करना शुरुआती चेतावनी जरूर है। सवाल है, सरकार खुदरा आपूर्ति बचाने के साथ उद्योगों की जरूरत वैâसे पूरी करेगी और बढ़ती लागत आखिर किसकी जेब से निकलेगी?

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