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इतने वोट पहली बार छिने!

-पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओ. पी. रावत का एसआईआर पर तीखा सवाल
-बोले, `आजादी के बाद पहली बार इतनी बड़ी संख्या में पात्र मतदाता वोट से वंचित’
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग पर उठ रहे सवालों के बीच पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओ. पी. रावत ने गंभीर टिप्पणी की है। रावत ने `द हिंदू’ से बातचीत में कहा कि आजादी के बाद यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में पात्र मतदाता अपने मतदान अधिकार से वंचित हुए हैं। उनके इस बयान ने पहले से जारी एसआईआर विवाद को और तेज कर दिया है।
रावत ने खास तौर पर मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के भीतर निर्णय-प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि तीन सदस्यीय आयोग में दो चुनाव आयुक्त किसी पैâसले से असहमत थे, तो बहुमत के आधार पर उस पैâलसे को रोका जा सकता था; मुख्य चुनाव आयुक्त के पास वीटो नहीं होता। इससे पहले रावत फॉर्म-६ में बदलाव को भी ‘गलत’ और ‘अवैध’ बता चुके हैं। दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों से जुड़ी रिपोर्टों में कहा गया था कि उन्होंने मतदाता पंजीकरण, नाम विलोपन और एसआईआर से जुड़े पैâसलों पर कई बार असहमति दर्ज की थी। कांग्रेस ने रावत की टिप्पणी का हवाला देते हुए करीब १४ करोड़ मतदाताओं के वंचित होने का दावा किया है। यह आंकड़ा कांग्रेस का राजनीतिक दावा है। चुनाव आयोग का कहना रहा है कि उसके आदेश विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत जारी किए गए हैं। यदि पात्र मतदाताओं के नाम बड़े पैमाने पर कटे, तो इसकी जवाबदेही किस स्तर पर तय होगी?

 

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