-`२५०० करोड़ के औद्योगिक पार्क का ढोल
-निवेश के नाम पर महायुति का झांसा
-उद्योगों की जमीनी परेशानियां जस की तस
रामदिनेश यादव / मुंबई
महाराष्ट्र को देश का सबसे पसंदीदा औद्योगिक गंतव्य बनाने के दावे लगातार किए जा रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर राज्य के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर कंपनियों की चिंता भी सामने आ रही है। पुणे सहित कई जिलों के उद्योगपति अन्य राज्यों की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे समय में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने एक बार फिर बड़े निवेश का ढोल पीटा है। उन्होंने नया चूरन देते हुए एक्सएसआईओ इंडस्ट्रियल पार्क्स में महाराष्ट्र में २,५०० करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की घोषणा की है। सरकार के साथ हुए समझौते के मुताबिक नागपुर, पुणे, छत्रपति संभाजीनगर, खालापुर, पालघर और मुंबई में औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे और लगभग ३,००० प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
लेकिन पुराने सवाल बरकरार
मुख्यमंत्री फडणवीस की अध्यक्षता में आयोजित ‘इन्वेस्ट महाराष्ट्र’ कार्यक्रम में ६७ समझौता ज्ञापनों के माध्यम से लगभग ८.५७ लाख करोड़ रुपए के प्रस्तावित निवेश और २.९१ लाख रोजगार की संभावना बताई गई है। सरकार इन आंकड़ों को महाराष्ट्र में निवेशकों के भरोसे के प्रमाण के रूप में पेश कर रही है। लेकिन सवाल यह है कि समझौता ज्ञापनों और निवेश घोषणाओं से आगे जमीन पर कितने उद्योग वास्तव में उतरते हैं? कितने रोजगार पैदा होते हैं? और राज्य के मौजूदा औद्योगिक क्षेत्रों में कंपनियों को जिन बुनियादी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, उनका समाधान कब होगा?
कंपनियों को रास्ता नहीं!
पुणे के चाकण और हिंजवड़ी जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में खराब सड़कों, यातायात और जल निकासी की समस्या को लेकर उद्योगों के स्थानांतरण की चिंता सामने आ चुकी है।
