-कचरे का पहाड़ और करोड़ों का खर्चा!..उत्तन के ग्रामीणों को रिझाने aहेतु मनपा का नया ‘तकनीकी झुनझुना’
सुरेश गोलानी / मुंबई
मीरा-भायंदर महानगरपालिका के पास जनता की गाढ़ी कमाई को भारी-भरकम तकनीकी नामों पर पानी की तरह बहाने की गजब की कला है। ताजा मामला उत्तन के धावगी डंपिंग यार्ड का है। कचरे का पहाड़ और उससे रिसने वाले जहरीले पानी (लीचेट) से परेशान और आक्रोशित ग्रामीणों को फिर एक बार रिझाने के उद्देश्य से फिर एक नया तकनीकी ‘झुनझुना’ थमाने का प्लान बनाया है। ।
मनपा ने अब ५ साल के बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर बीओटी (बीओटी) अनुबंध पर ‘मोबाइल मेम्ब्रैन अड्वान्स सिस्टम’ लाकर लीचेट फिराने (प्रक्रिया करने) के लिए टेंडर आमंत्रित किए हैं। दावा है कि इस सिस्टम के जरिए हर रोज २५,००० लीटर लीचेट पर प्रक्रिया करने की क्षमता होगी। मनपा का यह रवैया नया नहीं है। इससे पहले भी कचरा प्रबंधन और पिछले १२ सालों से जमा १० लाख मीट्रिक टन से अधिक के इस कचरे के पहाड़ को ठिकाने लगाने के नाम पर कई तकनीकें आजमाई गर्इं और करोड़ों रुपए स्वाहा किए जा चुके हैं, जिसके बाद भी जमीनी हकीकत जस की तस बनी हुई है।
ज्ञात हो कि २०१८ में मनपा द्वारा ५६.२० करोड़ रुपए का ‘बायो-माइनिंग’ प्रोजेक्ट अमल में लाया गया था। मनपा का दावा है कि बायो-माइनिंग तकनीक से अब तक ३ लाख मीट्रिक टन कचरे पर प्रक्रिया की जा चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक बरसात के कारण यह काम अभी बंद है, लेकिन इसे जल्द ही दोबारा शुरू कर दिया जाएगा। मनपा के इस नए टेंडर और ‘मोबाइल मेम्ब्रैन’ वाले झुनझुने पर शंका व्यक्त करते हुए ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यह केवल हमारा ध्यान भटकाने और एनजीटी तथा अदालत के आदेश के बावजूद इस कचरे के पहाड़ को वसई के सकवार में शिफ्ट न करने की सोची-समझी प्रशासनिक चाल है। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि वे अब मनपा के इन कागजी दावों के झांसे में नहीं आएंगे।
१२ साल से कचरे का साम्राज्य!
उत्तन के धावगी डंपिंग यार्ड में १० लाख मीट्रिक टन से अधिक कचरा जमा होने का दावा है। ५६.२० करोड़ रुपये के बायो-माइनिंग प्रोजेक्ट के बावजूद कचरे का पहाड़ अब भी चुनौती बना हुआ है। सवाल है कि करोड़ों खर्च करने के बाद भी ग्रामीणों को राहत कब मिलेगी?
