-`वोट चोर, गद्दी छोड़’!
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ गुरुवार को विरोध की आवाज कई शहरों में सड़कों पर सुनाई दी। दिल्ली में `इंडिया’ गठबंधन के नेताओं ने राजघाट पहुंचकर धरना दिया और चुनावी प्रक्रिया तथा मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। कल देशभर की सड़कों पर एक ही नारा गूंजता सुनाई दिया, ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’। विपक्ष ने साफ किया कि आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। दिल्ली, पटना, लखनऊ, उदयपुर, पटना, जयपुर, नागपुर, मुंबई दिल्ली, लखनऊ, बिहार इन जगहों पर गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन देखने को मिला। आज देश के अलग-अलग हिस्सों से उठी विरोध की आवाज ने चुनाव आयोग और सरकार की भूमिका को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
-ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा बढ़ी
नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आवास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। दिल्ली पुलिस ने यह कदम ताजा खतरे से जुड़े इनपुट मिलने के बाद उठाया है। अधिकारियों के मुताबिक, ज्ञानेश कुमार को पहले से ही जेड-प्लस सुरक्षा मिली हुई है, लेकिन नए खुफिया इनपुट और राजधानी में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों को देखते हुए उनके घर के बाहर अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आवाज से घबराई सरकार?
दिल्ली में ३८ हजार जवानों का पहरा!
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर १० अक्टूबर से प्रस्तावित ‘जंतर-मंतर २.०’ आंदोलन से पहले दिल्ली को पुलिस छावनी में बदलने की तैयारी है। लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन कोई युद्ध नहीं होता, फिर चुनाव आयोग के खिलाफ उठ रही आवाज को दबाने के लिए राजधानी में करीब ३८ हजार सुरक्षाकर्मियों की जरूरत क्यों पड़ गई? गृह मंत्रालय ने ८ से १२ अक्टूबर तक दिल्ली पुलिस को केंद्रीय बलों की २२१ कंपनियां उपलब्ध कराई हैं, जिनमें करीब २३ हजार जवान शामिल हैं। इसके अलावा १५ हजार दिल्ली पुलिसकर्मियों की तैनाती होगी।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आवाज से घबराई सरकार?
-दिल्ली में ३८ हजार जवानों का पहरा!
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर १० अक्टूबर से प्रस्तावित ‘जंतर-मंतर २.०’ आंदोलन से पहले दिल्ली को पुलिस छावनी में बदलने की तैयारी है। लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन कोई युद्ध नहीं होता, फिर चुनाव आयोग के खिलाफ उठ रही आवाज को दबाने के लिए राजधानी में करीब ३८ हजार सुरक्षाकर्मियों की जरूरत क्यों पड़ गई? गृह मंत्रालय ने ८ से १२ अक्टूबर तक दिल्ली पुलिस को केंद्रीय बलों की २२१ कंपनियां उपलब्ध कराई हैं, जिनमें करीब २३ हजार जवान शामिल हैं। इसके अलावा १५ हजार दिल्ली पुलिसकर्मियों की तैनाती होगी।
`ज्ञानेश कुमार गुप्ता लोकतंत्र का हत्यारा और महाचोर है’
चुनाव आयोग और एसआईआर के खिलाफ महागठबंधन ने पटना में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई। जिस पर तेजस्वी यादव चढ़ गए। कुछ ही देर में कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग तोड़ दी और आगे बढ़े। पुलिस के साथ धक्का-मुक्की भी हुई है। तेजस्वी यादव ने राज्यपाल से मुलाकात के बाद कहा, ‘ज्ञानेश कुमार को सीईसी बोलने में शर्म आती है। ज्ञानेश कुमार गुप्ता लोकतंत्र का हत्यारा है और महाचोर है। सबसे ज्यादा जरूरी है मोदी जी और अमित शाह को हटाना। हमारा मार्च शांतिपूर्ण था, लेकिन प्रशासन का रवैया तानाशाही वाला था। उन्होंने कहा कि पुलिस एके-४७ के साथ तैनात थी।
