मुख्यपृष्ठनए समाचारपरियोजनाएं सालों से रेंग रहीं!.. मुंबई को मिनटों में दौड़ाने का दावा

परियोजनाएं सालों से रेंग रहीं!.. मुंबई को मिनटों में दौड़ाने का दावा

एमएमआरडीए के ‘मुंबई इन मिनट्स’ विजन पर लोगों का तीखा तंज
संदीप पांडेय / मुंबई
मुंबईकरों को मेट्रो, लोकल, बस और सड़क नेटवर्क से जोड़कर सफर का समय घटाने के लिए एमएमआरडीए ने ‘मुंबई इन मिनट्स’ का विजन सामने रखा है। इसके तहत बेहतर कनेक्टिविटी के जरिए लोगों को कम समय में मंजिल तक पहुंचाने का लक्ष्य है। हालांकि, एमएमआरडीए के इस दावे पर एक नागरिक ने तंज कसते हुए इसकी हकीकत के दूसरे पहलू की ओर ध्यान खींचा है।
मिनटों में सफर का सपना,
जाम में घंटों की बर्बादी!
नागरिक ने सवाल उठाया कि जिस मुंबई को मिनटों में जोड़ने का सपना दिखाया जा रहा है, उसी मुंबई में मेट्रो और सड़क परियोजनाओं की बैरिकेडिंग के बीच कुछ किलोमीटर का सफर तय करने में लंबा समय लग रहा है। नागरिक ने एमएमआरडीए के दावे पर कटाक्ष करते हुए ‘५९ महीने की छूटी समयसीमा’ का सवाल भी उठाया।
मेट्रो-४ में देरी ने बढ़ाई चिंता
यह ५९ महीने किसी एक परियोजना की आधिकारिक देरी का आंकड़ा नहीं है, लेकिन परियोजनाओं के वर्षों तक खिंचने का मुद्दा जरूर गंभीर है। मेट्रो-४ इसका एक उदाहरण है। एमएमआरडीए ने २०२३ में जमीन से जुड़े मुकदमे के कारण इस परियोजना के एक मामले में ४६ महीने की देरी की जानकारी दी थी। अप्रैल २०२६ में भी मेट्रो-४ के लक्ष्मी नगर स्टेशन से जुड़े जमीन विवाद के करीब छह साल से लंबित होने की रिपोर्ट सामने आई। अगस्त २०२६ तक यह मेट्रो लाइन पूरी तरह तैयार नहीं हुई थी।

 

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