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शान एक कुत्ते की

-विमल मिश्र

शुक्रवार को मुंबई के पाठकों ने महानगर का सबसे बड़ा अखबार खोला तो भीतर के पृष्ठ पर एक खबर पढ़कर चौंक गए। एक सड़क दुर्घटना की मामूली सी खबर। पर दुर्घटना में घायल होने वाला कोई आम या खास इंसान नहीं, एक कुत्ता था। कोई आमूली-मामूली कुत्ता नहीं। टाटा घराने का सबसे शानदार कुत्ता। उसके दिवंगत मुखिया रतन टाटा का पालतू कुत्ता ‘गोवा’, जो फोर्ट में टाटा घराने के मुख्यालय बॉम्बे हाउस के पास एक कार दुर्घटना में चोट खा बैठा था।
खबर के अनुसार, ‘गोवा’ को तुरंत बॉम्बे हाउस ले जाया गया, जिसके ‘कुत्ताघर’ का वह सबसे अहम बाशिंदा है। उसकी चिकित्सा के लिए खास चिकित्सकों का एक दल पहले से ही मौजूद था। उसकी खैर-खबर लेने टाटा घराने के अधिकारियों का तांता लग गया। मिजाजपुर्सी के लिए खुद रतन टाटा के उत्तराधिकारी टाटा घराने के नए मुखिया नोएल टाटा खुद आए। बहरहाल, ‘गोवा’ ठीक है। उसकी सेहतमंदी को लेकर सबसे अधिक चिंता इस बात की है कि वह ११ अक्टूबर को कालबादेवी के ऑवर लेडी ऑफ हेल्थ चर्च में ‘ब्लेसिंग्स ऑफ पेट्स’ सेरेमनी में भाग लेने के काबिल हो जाए, जिसका ‘चीफ गेस्ट’ वह है।
टाटा खानदान का कुत्ता प्रेम शुरू से प्रसिद्ध है। बॉम्बे हाउस में जे. आर. डी. टाटा के जमाने से ही कुत्तों को अभय हासिल है। यहां आपको कुत्ते ही कुत्ते दिखेंगे। बगैर किसी जंजीर या सींखचों से बंधे अपने लिए बनाए गए गद्दों पर आराम फरमाते हुए। खिलौनों से खेलते हुए और स्वादिष्ट भोज्य पदार्थों का आनंद उठाते हुए। विशेष स्टाफ और सुरक्षाकर्मी के साथ समय-समय पर उनके मेडिकल चेक-अप और चिकित्सा के लिए पशु चिकित्सक नियत हैं। इन्हें स्टाफ को स्पष्ट निर्देश है, ‘कुत्तों को हर समय सुरक्षित और खतरों से बचाकर रखना है।’
फोर्ट में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के सामने कैपिटॉल सिनेमा के बगल से हजारीमल सोमानी मार्ग चर्चगेट की ओर जा रहा है, उसकी सबसे आखिरी इमारतों में बॉम्बे जिमखाना के ठीक सामने शानदार महल सरीखा एस्प्लेनेड हाउस है, जहां जमशेदजी टाटा परिवार सहित स्वयं रहते थे। यहां से गुजरते समय दाईं तरफ के प्रवेश द्वार के पास गौर से देखें-आपको टेराकोटा से बना एक छोटा-सा स्मारक दिखेगा। यह स्मारक है ‘सेंट बर्नार्ड’ नामक जमशेदजी टाटा के स्वामिभक्त कुत्ते का।
टाटा घराना जिस पारसी धर्म से ताल्लुक रखता है, उसमें कुत्तों का बहुत महत्व है। इसके धर्म ग्रंथ ‘अवेस्ता’ में बुरे साये से दूर रहने के लिए कुत्तों को शुभ बताते हुए समुदाय को उन्हें खाना खिलाने और उनका ख्याल रखने को कहा है। कुत्तों को स्वच्छ, परोपकारी, दृष्टि को पवित्र बनाने वाला और दुष्ट प्रवृत्तियों को भगाने वाला माना जाता है। पारसी धर्म की मान्यता के अनुसार, मृत्यु के बाद प्रत्येक आत्मा को जब Bridge Of kudgement,, यानी चिनवट पुल पार करना पड़ता है तो कुत्ते ही उनकी रक्षा करते हैं। किसी व्यक्ति की आत्मा वास्तव में उसकी देह छोड़ चुकी है, इसकी तसल्ली भी कुत्ते ही उसे सूंघकर करते हैं। पारसी विषयों के विशेषज्ञ टोरंटो विश्वविद्यालय के शोध विद्वान जेसी एस. पलसेटिया ने अपने लेख Mad Dogs And Parsis: The Bombayed Dog Riots Of 1832 में लिखा है कि किस तरह शहर के बेजुबान कुत्तों को बचाने के लिए मुंबईवासी ताकतवर अंग्रेजी हुकूमत तक से लड़ गए थे और उनकी कमान संभाली थी मुंबई के पारसी समाज ने।

 

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