मुख्यपृष्ठनए समाचारसठिया गइल का...!..दिल्ली में धरना, भाजपा को दिख गया नेपाल-बांग्लादेश!

सठिया गइल का…!..दिल्ली में धरना, भाजपा को दिख गया नेपाल-बांग्लादेश!

-विरोध का नाम सुनते ही अराजकता का अलार्म क्यों बजने लगता है?
अरे भैया, दिल्ली में धरना हुआ और भाजपा को नेपाल-बांग्लादेश दिखाई देने लगा! अब कोई पूछे कि राजधानी की सड़कों पर प्रदर्शन हो रहा है या अंतरराष्ट्रीय भूगोल की परीक्षा? ८ अक्टूबर को भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस भारत में नेपाल और बांग्लादेश जैसी अराजकता पैदा करना चाहती है। उन्होंने बुधवार के प्रदर्शन का वीडियो दिखाकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पुलिसकर्मियों से मारपीट करने का आरोप भी लगाया। उधर, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने विपक्ष पर समाज में जहर फैलाने और अराजक मानसिकता रखने का आरोप जड़ दिया। वाह रे राजनीति! विरोध प्रदर्शन दिल्ली में, तुलना पड़ोसी देशों से! लगता है, राजनीतिक शब्दकोश में अब धरना, प्रदर्शन और क्रांति के बीच का अंतर ही मिटता जा रहा है। भैया, पुलिस से मारपीट हुई है तो कानून अपना काम करे। सबूत सामने आएं, जिम्मेदारी तय हो। लेकिन किसी प्रदर्शन में कथित हिंसा के आधार पर पूरे आंदोलन को विदेशी अराजकता का नमूना बताना कौन-सा नया राजनीतिक गणित है? विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है। मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के आरोप लगा रहा है। चुनाव आयोग और भाजपा इन आरोपों को खारिज कर चुके हैं। यानी मामला गंभीर है, विवाद भी गंभीर है। मगर गंभीर सवालों का जवाब देने के बजाय जब शब्दों की तोपें गरजने लगें, तब बहस कम और तमाशा ज्यादा दिखाई देता है। भाजपा भी कमाल है! चुनाव आयोग पर आरोप लगते हैं, तो उन आरोपों पर जवाब देने की जिम्मेदारी भी उसी की बनती है, पर भाजपा हाथ में माइक पकड़कर आरोप नकारने लगती है। कमाल देखिए! सत्ता पक्ष को हर विरोध में अराजकता नजर आती है और चुनाव आयोग को साजिश! जनता बेचारी सोच रही है, हमने चुनाव आयोग पर सवाल पूछा था, जवाब में भाजपाई प्रोफेसरों से नेपाल-बांग्लादेश का भूगोल और देशभक्ति का पूरा पाठ्यक्रम मिल गया! अरे नेताजी, सवाल हिंदुस्तान का है। जवाब भी हिंदुस्तान का दीजिए। पड़ोसी देशों को हर बहस में क्यों घसीटते हैं? का सठिया गइल का…!

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